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NCERT solutions for Hindi Ganga [English] Class 9 chapter 9 - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद [Latest edition]

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Chapters

गद्य खंड

   Chapter 1: दो बैलों की कथा

   Chapter 2: क्या लिखूँ?

   Chapter 3: संवादहीन

   Chapter 4: ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)

   Chapter 5: आखिरी चट्टान तक

   Chapter 6: रीढ़ की हड्डी

    7: मैं और मेरा देश

काव्य खंड

    8: पद

▶ 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

    10: भारति, जय, विजयकरे!

    11: झाँसी की रानी

    12: घर की याद

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Solutions for Chapter 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Below listed, you can find solutions for Chapter 9 of CBSE NCERT for Hindi Ganga [English] Class 9.


अभ्यास
अभ्यास [Pages 156 - 163]

NCERT solutions for Hindi Ganga [English] Class 9 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद अभ्यास [Pages 156 - 163]

रचना से संवाद - मेरे उत्तर मेरे तर्क

1.Page 156

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा॥” यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है?

  • आदर और सम्मान

  • भक्ति और श्रद्धा

  • भय और शिष्टाचार

  • प्रेम और सहिष्णुता

2.Page 156

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा” पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है?

  • संवेदनशीलता

  • शिष्टता

  • सहनशीलता

  • उदासीनता

3.Page 156

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“अति रिस बोले बचन कठोरा।” जनक के प्रति परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था-

  • उचित आदर-सत्कार न मिलना

  • जनक द्वारा समाचार छिपाना

  • शिव धनुष का खंडित होना

  • अन्य राजाओं की सभा में उपस्थिति

4.Page 156

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

राम का कथन “होइहि केउ एक दास तुम्हारा” उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?

  • कूटनीति और चतुराई

  • विनम्रता और मर्यादा

  • त्याग और समर्पण

  • दृढ़ता और आत्मविश्वास

5.Page 157

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।” लक्ष्मण के मुस्कराने और उपहास भरे वचनों का क्या कारण था?

  • वे सभा में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहते थे।

  • उन्हें राम के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना था।

  • वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे।

  • वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।

मेरी समझ मेरे विचार

1.Page 157

नीचे दिए गए प्रश्न पर चर्चा कीजिए और उसका उत्तर लिखिए-

“अरध निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों?

2.Page 157

नीचे दिए गए प्रश्न पर चर्चा कीजिए और उसका उत्तर लिखिए-

“सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥” पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज- समाज पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

3.Page 157

नीचे दिए गए प्रश्न पर चर्चा कीजिए और उसका उत्तर लिखिए-

तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का ‘विनय’ का मार्ग उचित है या लक्ष्मण के ‘तर्क’ का? अपने उत्तर का उचित कारण और तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।

4.Page 157

नीचे दिए गए प्रश्न पर चर्चा कीजिए और उसका उत्तर लिखिए-

‘हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु ।’ श्री राम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। यह उनके व्यक्तित्व के किन गुणों को दर्शाता है? उनका भावनात्मक संतुलन इस पूरे पाठ में उन्हें अन्य पात्रों से अलग कैसे स्थापित करता है?

मेरी कल्पना मेरे अनुमान

1.Page 157

नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर दीजिए-

कल्पना कीजिए कि आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम के आगमन से लेकर उनके गमन तक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।

2.Page 157

नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर दीजिए-

“अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।” जनक द्वारा डर से चुप रहने पर अन्य राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए होंगे?
(संकेत – सोचिए, यह मनुष्य के व्यवहार की किस सच्चाई को उजागर करता है?)

विधा से संवाद - कविता का सौंदर्य

1.Page 158

यह कविता तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य रामचरितमानस के ‘बालकांड’ का एक अंश है जहाँ शिव धनुष के टूटने से क्रोधित परशुराम के रोष भरे वाक्यों का उत्तर लक्ष्मण व्यंग्य वचनों से देते हैं। दोनों के बीच के ये संवाद कविता में नाटकीयता उत्पन्न करते हैं। संवादों के माध्यम से ही पूरी कविता का कथात्मक विकास होता है, संवाद ही चरित्र का निर्माण करते हैं और संवादों से ही भावों में विविधता भी आती है। इस प्रकार यह कविता काव्यात्मक विधा में संवाद प्रस्तुति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। नीचे कविता के संवादों की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं। उन विशेषताओं को दर्शाने वाली पंक्तियों के उदाहरण कविता से ढूँढ़कर लिखिए।

संवादों की विशेषता

  • राम की विनम्रता
  • परशुराम का रौद्र रूप
  • लक्ष्मण का प्रत्युत्तर
  • पौराणिक संदर्भ
  • नाटकीयता

भाव-पहचान एवं विश्लेषण

1.Page 158

आपने पढ़ा कि राजा जनक की सभा में उपस्थित विभिन्न पात्रों की मनःस्थिति अलग-अलग है। नीचे दिए गए भावों/मन:स्थिति को दर्शाने वाली पंक्तियों को कविता से चिह्नित कीजिए और बताइए कि यह भाव किस पात्र से संबंधित है और उसकी इस मनःस्थिति का कारण क्या है? आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।

चिंता, क्रोध, व्यग्रता, भय, संयम/विनम्रता, ईर्ष्या/कुटिलता

भाव/मेन:स्थिति संबंधित पंक्ति संबंधित पात्र मन:स्थिति का कारण
चिंता बिधि अब सँवरी बात बिगारी सीता की माता सुनयना पुत्री सीता के भविष्य (विवाह) केप्रति आशंकित और चिंतित
2.Page 159

“अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं।”

परशुराम के पूछने पर जनक का मौन भयजनित है या विवेकपूर्ण निर्णय? संवाद की स्थिति के आधार पर विश्लेषण कीजिए।

काव्य-पंक्ति और भाव

1.Page 159

“रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार।
धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।”

(क) यदि आप इन पंक्तियों को मंच पर बोलते, तो आपके चेहरे पर कौन-सा भाव होता?

(ख) आपने अनुभव किया होगा कि इस कविता में परिस्थितिवश प्रत्येक पात्र एक अलग भाव का प्रतिनिधि बन जाता है। निम्नलिखित पात्रों को आप कौन-कौन से भावों द्वारा प्रदर्शित करेंगे-

  • परशुराम
  • राजा जनक
  • लक्ष्मण
  • राम
  • सभा में उपस्थित अन्य राजा

विषयों से संवाद

1.Page 159

सभा में परशुराम के प्रति राम के व्यवहार से उनकी विनम्रता, मर्यादा, धीर और उदार चरित्र के संबंध में पता चलता है जो किसी भी कुशल शासक के लिए आवश्यक है। आपको किन-किन परिस्थितियों में इन विशेषताओं का परिचय देना पड़ता है? चर्चा कीजिए और लिखिए।

2.Page 160

कविता में वर्णित प्रसंग सीता स्वयंवर की सभा का है। प्राचीन भारतीय समाज में वर चयन के लिए स्वयंवर की प्रथा प्रचलित थी। इसके अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऐसी किसी एक पौराणिक ऐतिहासिक आदि घटना/ प्रसंग का वर्णन कीजिए जिससे स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की जानकारी मिलती है।

सृजन

1.Page 160

परशुराम के क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना दोनों चिंतित हैं और सीता के लिए एक-एक पल युग के समान भारी और लंबा प्रतीत हो रहा है। उनकी मन:स्थिति का अनुमान लगाते हुए उस क्षण दोनों के बीच चल रहा मौन संवाद लिखिए।

2.Page 160

सभा में हो रहे संवाद को दूर बैठी सीता, राजा जनक और अन्य लोग भी सुन रहे थे। अपनी कल्पना और अनुमान के आधार पर लिखिए कि उस समय सीता के मन में किस तरह के भाव उत्पन्न हो रहे होंगे? सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए।

(संकेत – लक्ष्मण के प्रत्युत्तर पर चिंता, गर्व, हँसी, भय, शंका इत्यादि)

3.Page 160

कविता में सभा में उपस्थित राजाओं ने अपनी वीरता, पराक्रम आदि का उल्लेख करते हुए अपना परिचय दिया है। यदि आपको अपना परिचय देना हो तो आप अपना परिचय किस प्रकार देना उचित समझेंगे? अपना परिचय देते हुए कुछ वाक्य लिखिए जिससे आपके व्यक्तित्व की महत्त्वपूर्ण बातों का पता चलता हो।

भाषा से संवाद - व्याकरण की बात

1.Page 160

नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए-

  • “देखत भृगुपति बेषु कराला।”
  • “बोले परसुधरहि अपमाने।।”
  • “सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू”

यहाँ परशुराम को विभिन्न नामों से संबोधित किया गया है; जैसे- भृगुपति, परसुधर और भृगुकुलकेतू। आप इस कविता में अनेक विशेषताएँ देख सकते हैं, जैसे- दोहा – चौपाई का क्रम से होना, बिना वक्ता का नाम बताए उसका कथन कह देना, मुहावरों का उपयोग करना आदि । नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और उनके एक-एक उदाहरण दिए गए हैं। एक-एक उदाहरण आप लिखिए।

विशेषता अर्थ उदाहरण
अनुप्रास अलंकार एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति अरि करनी करि करिअ लराई
अतिशयोक्ति अलंकार बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना अरध निमेष कलप सम बीता
रूपक अलंकार रूप का आरोपण करना पद सरोज मेले दोउ भाई

बहुभाषिकता

1.Page 161

यह कविता अवधी भाषा में लिखी गई है जो कि हिंदी भाषा का ही एक स्वरूप है और उत्तर प्रदेश के अनेक स्थानों पर बोली जाती है। कविता में ऐसे बहुत से शब्द आए हैं जो अवधी भाषा के हैं। ऐसे शब्दों को पहचान कर उनके खड़ी बोली हिंदी रूप लिखिए। साथ ही आपकी भाषा में इनके लिए कौन-से शब्द प्रयुक्त होते हैं, उन्हें भी लिखिए।

उदाहरण-

अवधी शब्द खड़ी बोली का शब्द मेरी भाषा में शब्द
कोही क्रोधी  
वेषु वेष  

लोक में भाषा

1.Page 161

नीचे कोष्ठक में कविता से कुछ शब्द चुनकर दिए गए हैं। उन शब्दों से संबंधित लोकोक्ति और उसका अर्थ लिखकर स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।

मन, राम, राजा, बात, सिरु (सिर)

उदाहरण-

शब्द लोकोक्ति अर्थ
मन मन के जीते जीत है, मन के हारे हार। आत्मविश्वास, साहस और मनोबल से सफल निश्चित है।

गद्य-रूप

1.Page 162

नीचे लिखी चौपाई को पढ़िए-

“नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।
आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।”

इस चौपाई को हम गद्य-रूप में भी लिख सकते हैं। इसमें राम परशुराम से विनम्रतापूर्वक कहते हैं- हे नाथ! शिव-धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा। आपकी क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते? राम की यह बात सुनकर क्रोधित परशुराम कहते हैं।

अब आप नीचे दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए-

“अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं । कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।
सुर मुनि नाग नगर नर नारी सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।”

गतिविधियाँ

1.Page 162

यह कविता संवाद का सुंदर उदाहरण है। तालिका में दिए गए कथनों को पढ़कर बताइए कि कौन-सा कथन किसका हो सकता है। अपनी समझ से सही (✓) का चिह्न लगाइए-

कथन राम लक्ष्मण परशुराम जनक सीता की माता (सुनयना)
शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई दास ही हो सकता है।          
विधाता ने बनी-बनाई बात बिगाड़ दी।          
सेवक वह होता है जो सेवा का काम करे।          
इस कारण ये सब राजा आए हैं।          
बचपन में हमने ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ डाली हैं।          
क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते?          
कहो जनक, किस कारण यह भीड़ है?          
इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों!          
2.Page 163

रामचरितमानस के इस प्रसंग का मंचन लोकनाट्य, रामलीला और कठपुतली कला में बड़ी जीवंतता से किया जा सकता है। कलात्मक तकनीकों (ध्वनि, भाव, संगीत, वेशभूषा) का उपयोग करते हुए कविता को एक दृश्य नाटक के रूप में प्रस्तुत कीजिए।

3.Page 163

‘कठिन परिस्थितियों में भी सत्य कहने का साहस करना आवश्यक है।’ इस विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा अथवा वाद-विवाद गतिविधि के माध्यम से अपने विचार साझा कीजिए।

मेरी पहेली

1.Page 163

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अब अपने समूह में मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-

समाचार, धनुष, मन, नाग, नगर

भाषा संगम

1.Page 163

“अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा।”

नीचे ‘धनुष’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

कमान (हिंदी); धनुः, चापम् (संस्कृत); धणुख (पंजाबी); कमान (क़ौस) (उर्दू); कमान (कश्मीरी); धनुषु, कमानु (सिंधी); धनुष्य (मराठी); धनुष, कामठुं (गुजराती); धनुश (कोंकणी); धनु (नेपाली); धनुक (बांग्ला); धनु (असमिया); लिरू् (मणिपुरी); धनुष, धनु, कार्मुक (ओड़िआ); धनुस्सु, विल्लु (तेलुगू); विल् (तमिल); धनुस्सुँ, विल्लुॅ (मलयालम); बिल्लु, धनुष (कन्नड़)

  • इनके अतिरिक्त यदि आप धनुष शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
  • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
    https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

Solutions for 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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