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‘कठिन परिस्थितियों में भी सत्य कहने का साहस करना आवश्यक है।’ इस विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा अथवा वाद-विवाद गतिविधि के माध्यम से अपने विचार साझा कीजिए।

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Question

‘कठिन परिस्थितियों में भी सत्य कहने का साहस करना आवश्यक है।’ इस विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा अथवा वाद-विवाद गतिविधि के माध्यम से अपने विचार साझा कीजिए।

Activity
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Solution

सत्य बोलना एक महत्वपूर्ण नैतिक गुण है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में सच कहना कई बार साहस की कसौटी बन जाता है। लोग कभी-कभी समाज, दबाव या संभावित परिणामों के भय से सत्य छिपाने का प्रयास करते हैं। ऐसे में यह विचार करना आवश्यक है कि क्या ऐसा करना उचित है।

समर्थन में विचार (सत्य बोलना आवश्यक है)

  1. मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण - सत्यवादी व्यक्ति विश्वसनीय माना जाता है और उसका व्यक्तित्व सुदृढ़ बनता है।
  2. स्थायी लाभ - झूठ से कुछ समय के लिए लाभ मिल सकता है, लेकिन अंततः सत्य ही प्रकट होता है।
  3. न्याय और विश्वास की स्थापना - समाज में ईमानदारी, न्याय और आपसी विश्वास बनाए रखने के लिए सत्य आवश्यक है।
  4. आत्मसम्मान की सुरक्षा - सच बोलने वाला व्यक्ति अपने आत्मसम्मान और नैतिक मूल्यों को बनाए रखता है।

विरोध में विचार (कुछ परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं)

  1. हानि या दंड का भय - कभी-कभी सत्य कहने से व्यक्ति को नुकसान या दंड मिलने की आशंका होती है।
  2. भावनाओं पर प्रभाव - कुछ स्थितियों में सत्य किसी व्यक्ति की भावनाओं को आहत कर सकता है और संबंधों में तनाव ला सकता है।

यद्यपि कई परिस्थितियाँ सत्य बोलने को कठिन बना देती हैं, फिर भी सत्य का मार्ग सबसे उचित और स्थायी माना जाता है। साहसपूर्वक सत्य का साथ देने से व्यक्ति नैतिक रूप से अधिक मजबूत बनता है। रामचरितमानस में श्रीराम का चरित्र भी हमें यही प्रेरणा देता है कि सत्य, विनम्रता और मर्यादा का पालन ही आदर्श जीवन का आधार है।

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Chapter 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद - अभ्यास [Page 163]

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NCERT Hindi Ganga [English] Class 9
Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
अभ्यास | Q 3. | Page 163
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