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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 9th Standard

वर्णनात्मक निबंध: विज्ञान प्रदर्शनी का वर्णन

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Question

वर्णनात्मक निबंध: विज्ञान प्रदर्शनी का वर्णन

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Solution

विज्ञान प्रदर्शनी

ज्ञान का विशिष्ट रूप ही विज्ञान है। समृद्ध ज्ञान और मनुष्य की सकारात्मक सोच ने वर्तमान युग को विज्ञान युग बना दिया है। विज्ञान की सहायता से मनुष्य ने अपना जीवन अत्यंत सरल व सुविधाजनक बना लिया है। विज्ञान के सदुपयोग से एक ओर जहाँ मानव कई समस्याओं को हल करने में सफल हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग से न केवल मानव बल्कि अन्य प्राणियों के लिए भी नित नए संकट खड़े हो रहे हैं। विज्ञान के गुण-दोषों की मिली-जुली ऐसी ही एक झलक हमें विज्ञान प्रदर्शनी में देखने को मिली।

भारत में २८ फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है, और इस वर्ष इसी दिन मुंबई स्थित विज्ञान प्रदर्शनी केंद्र में एक विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इसमें जिला स्तर के 25 विद्यालयों ने भाग लिया था, और लगभग 5 विद्यालयों को प्रोत्साहन के लिए आमंत्रित किया गया था। हमारे विद्यालय से मैं और मेरे चार मित्र अपने विज्ञान शिक्षक के मार्गदर्शन में इस प्रदर्शनी में उपस्थित थे। वहाँ पहुंचते ही हमें ऐसा महसूस हुआ, जैसे हम विज्ञान की दुनिया में आ गए हों।

केंद्र पर पहुँचते ही हमें विज्ञान की शक्ति का अनुभव होने लगा। मुख्य द्वार से केवल उन्हीं को प्रवेश की अनुमति थी, जिनके पास केंद्र द्वारा दिए गए ताँबे के सिक्के थे। द्वार पर बने बक्से में सिक्का डालते ही द्वार 20 सेकंड के लिए खुल गया और हम अंदर चले गए। एक विशाल सभागार रंग-बिरंगे बल्बों और प्रकाश की किरणों से जगमगा रहा था।

सभागृह के चारों ओर विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों के समूहों ने अपने-अपने वैज्ञानिक प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए थे। प्रत्येक विद्यालय से पाँच-पाँच विद्यार्थी आए थे। एक स्टॉल पर सौर ऊर्जा से संबंधित मॉडल रखे थे, तो किसी में मोटर के जरिए जलचक्र के सिद्धांत समझाए जा रहे थे। कहीं मानव शरीर का थ्री-डी मॉडल बना हुआ था, तो कहीं रॉकेट प्रक्षेपण का नमूना दिखाया जा रहा था। तीसरे स्टॉल में अनुपयोगी प्लास्टिक को पिघलाकर अलग-अलग साँचों में डालकर उससे कंघी, खिलौने, आभूषण, और डिब्बे जैसी नई प्लास्टिक वस्तुएँ बनाई जा रही थीं। सातवें स्टॉल पर गोबर से बना एक छोटा गोबर गैस संयंत्र था, जिससे कई बल्ब और पंखे चल रहे थे। चौदहवें स्टॉल पर विद्युत प्रवाह और चुंबकीय शक्ति के मॉडल प्रदर्शित थे। अठारहवें स्टॉल पर तो आश्चर्यजनक चीज थी। बच्चों ने एक छोटा बैटरी से चलने वाला रोबोट खिलौना बनाया था, जो रिमोट के आदेश पर उठ-बैठ सकता था और छोटे सामान उठा सकता था। वह कागज और प्लास्टिक के टुकड़े अलग-अलग कूड़ेदान में डाल देता था। यह सब विज्ञान के सहारे ही संभव हो सका था।

कुछ स्टॉल ऐसे भी थे, जिनसे विज्ञान के नकारात्मक प्रभाव साफ झलक रहे थे। स्टॉल नंबर 20 पर कारखानों और वाहनों से निकलने वाले दूषित धुएं और जल को नदियों और समुद्र में छोड़े जाने का चित्रण किया गया था, जिससे जलीय और वायु में रहने वाले प्राणियों को मरते हुए दिखाया गया। स्टॉल नंबर 25 पर अनाज की सुरक्षा का तरीका समझाया गया था। एक फुटबॉल पर चारों ओर कांच के टुकड़े चिपकाकर उसे अनाज के बीच रखा गया था। जैसे ही फुटबॉल पर धूप पड़ी, कांच से प्रकाश परावर्तित होने लगा और पक्षी उस प्रकाश से चकाचौंध हो गए। इससे अनाज तो सुरक्षित हो गया, लेकिन पक्षियों पर इसका बुरा असर पड़ा। मैं सोचने लगा कि इस विधि से पक्षियों से तो बचा जा सकता है, लेकिन अनाज में लगने वाले सूक्ष्म जीव-जंतुओं से नहीं। अनाज की सुरक्षा संभव है, लेकिन इस प्रक्रिया से पर्यावरणीय घटकों को नुकसान पहुँच रहा है।

अंतत: इस विज्ञान-प्रदर्शनी से मैंने यह सीखा कि विज्ञान आवश्यक है। उसका उपयोग निरंतर बढ़ता ही रहना चाहिए, परंतु वह पर्यावरण हितैषी भी होना चाहिए। वास्तव में इस विज्ञान प्रदर्शनी ने मुझमें राष्ट्र व उसकी प्रगति के प्रति अपने कर्तव्य तथा समस्त जीव-कल्याण की भावना का बोध कराया है।

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निबंध लेखन
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Chapter 4: रचना विभाग - निबंध लेखन [Page 88]

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Balbharati Hindi Lokbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 4 रचना विभाग
निबंध लेखन | Q (१) २. | Page 88
Balbharati Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 2.14 रचना एवं व्याकरण विभाग
स्वाध्याय | Q (३) | Page 118
Balbharati Hindi (Composite) Lokvani Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 2.9 रचना विभाग एवं व्याकरण विभाग
निबंध | Q (१) | Page 52

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