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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

किसी पालतू प्राणी की आत्‍मकथा लिखिए।

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Question

किसी पालतू प्राणी की आत्‍मकथा लिखिए।

Answer in Brief
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Solution

       मेरी इस दुनिया में विभिन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इस दुनिया में सबसे वफादार प्रणियों में से मेरी जाति एक है। जब भी स्वामिभक्ति, ईमानदारी, सजगता और कर्तव्यनिष्ठा की बात होती है, तब हमें ही याद किया जाता है। मैं कुत्ता हूँ, मेरा नाम टॉम है।

     अपने जन्म से एक माह तक मैं अपनी माता लॉरेन के साथ रहा। मैं अपने छोटे भाई-बहनों के साथ बहुत उछल-कूद करता था। उसके बाद मेरे मालिक ने मुझे एक ब्रह्मण परिवार में बेच दिया। वहाँ पर मेरा नाम टॉम रखा गया। इस परिवार के मुखिया ही अब मेरे मालिक हैं। शुरू-शुरू में मेरे मालिक मुझे रोज मेरी माँ लॉरेन के पास ले जाते थे। अब मैं तीन वर्ष का हो गया हूँ। मैं बहुत हृष्ट- पुष्ट और तंदुरुस्त हूँ। मेरे मालिक मुझे महीने में एक बार डॉक्टर के पास ले जाते हैं। अब मैं इस परिवार का हिस्सा बन गया हूँ। मैं परिवार के प्रत्येक सदस्य के इशारों व उनकी बातों को समझने लगा हूँ और उसी आधार पर मैं उनसे बर्ताव भी करता हूँ। कब मुझे खुश होना है; कब भक्ति प्रदर्शन करना है; कब शांत होकर बैठ जाना है, इसका मुझे पूरा ज्ञान है। मेरे मालिक मुझे सुबह-शाम सैर कराने ले जाते हैं। मैं रास्ते में पड़ी चीजों को सूंघता जाता हँ। मैं बच्चों व मालिक के साथ बहुत खेलता-कूदता हँ। इससे मेरा अच्छा व्यायाम और मनोरंजन होता है।

      मल-मूत्र आदि का त्याग करने मैं घर से बाहर निर्धारित जगह पर ही जाता हूँ। मैं साफसुथरा रहता हूँ। मैं घर में कभी-भी गंदगी नहीं करता। मेरा पसंदीदा भोजन दूध-रोटी, ककड़ी, टमाटर, बिस्किट, टोस, आलू और मटर है। मैंने इस परिवार की सुरक्षा का भार अपने ऊपर ले लिया है। यदि कोई अनजान व्यक्ति घर की तरफ आता है या घर में घुसने का प्रयास करता है, तो मैं सजग हो जाता हूँ। मैं लोगों की शक्ल तथा व्यवहार देखकर उनकी सज्जनता का पता लगा लेता हूँ। मैं हमेशा चौकन्ना रहता हूँ। जरा-सी आवाज आने पर मेरे कान खड़े हो जाते हैं। मेरी सूँघने की शक्ति इतनी तेज है कि गंध का स्मरण करके मैं व्यक्ति को पहचान लेता हूँ।

     मेरे मालिक मुझसे बहुत प्यार करते हैं। त्याग, सहनशीलता, स्वामिभक्ति व नम्रता ये सभी गुण जन्म से मेरे स्वभाव में हैं। इन्हीं गुणों के कारण आज मेरी अलग पहचान है। मेरे मालिक के परिवार के साथ ही उनके मित्र व आस-पड़ोस के लोग भी मेरे इन्हीं गुणों व स्वभाव के कारण मेरी प्रशंसा करते नहीं थकते। मैं भी उनके मुख से स्वयं की प्रशंसा सुनकर गौरवान्वित महसूस करता हूँ। मैं अपने मालिक व इस परिवार से बहुत खुश हूँ, क्योंकि यहाँ मेरा पूरा ध्यान रखा जाता है।

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निबंध लेखन
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Chapter 1.02: लक्ष्मी - उपयोजित लेखन [Page 9]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Lokbharati Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 1.02 लक्ष्मी
उपयोजित लेखन | Q (१) | Page 9

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