Advertisements
Advertisements
Question
वैचारिक निबंध: अकाल: एक भीषण समस्या
Advertisements
Solution
अकाल: एक भीषण समस्या
पर्यावरण का संतुलन ही संतुलित जीवन का आधार है। जो प्रकृति जीवन देती है, उसे पोषित करती है; वही प्रकृति गुस्सा हो जाने पर मृत्यु का कारण भी बन जाती है। अति और अल्प ही समस्त समस्या का मूल है। एक तरफ जल की अति होने पर बाढ़, तो दूसरी ओर जल की अल्पता से अकाल की स्थिति निर्मित हो जाती है। यह असंतुलन प्रकृति में प्राकृतिक ढंग से नहीं होता है। इसके जिम्मेदार मुख्य रूप से मनुष्य ही हैं।
कई दशकों और सदियों से मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए वृक्षों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक जलस्रोतों को नष्ट कर रहा है। बड़े तालाबों को बांटकर, ऊँचे पर्वतों को काटकर, और घने, सुंदर वनों पर अतिक्रमण कर नए-नए घर, बंगले और इमारतें बनाने की महत्वाकांक्षाएँ ही कई प्राकृतिक समस्याओं को जन्म दे रही हैं, जिससे पर्यावरण का जीवनचक्र प्रभावित हो रहा है।
अकाल का एक प्रमुख कारण वर्षा का न होना है, और इसका कारण है मानवीय अतिक्रमण। वन-संपदा के निरंतर नाश के कारण समय पर वर्षा नहीं होती, जिससे अकाल की भयावहता चरम पर पहुँच जाती है। खेतों में फसल नहीं उगाई जा सकती, और ऐसे में पेट भरने व जीवित रहने के लिए अन्न उपलब्ध नहीं होता है। इससे मनुष्यों और जानवरों में हाहाकार मच जाता है।
आज के समय में, मनुष्य को प्रकृति के पतन का अपराधबोध हो रहा है। वह हर स्तर पर अकाल की समस्या को रोकने की कोशिश कर रहा है, और ऐसी समस्या उत्पन्न होने पर उससे निपटने का प्रयास कर रहा है। न केवल देश की सरकार, बल्कि जागरूक और शिक्षित नागरिक भी इसमें योगदान दे रहे हैं। सरकारी योजनाओं के तहत बड़े-बड़े तालाब खुदवाए जा रहे हैं, नहरें बनाई जा रही हैं, और नदियों पर बाँध बनाकर जल संवर्धन किया जा रहा है।
जन जागरूकता और पर्यावरण संबंधी नए कानूनों के कारण न केवल वन-संपदा का संरक्षण हो रहा है, बल्कि समग्र पर्यावरण का संतुलन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम भविष्य में सकारात्मक होगा, और शायद हमें फिर कभी अकाल की भीषणता का सामना नहीं करना पड़ेगा। यदि पूरा भारत प्राकृतिक आपदाओं से मुक्त रहता है, तो देश विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ता रहेगा।
RELATED QUESTIONS
मेरा देश भारत विषय पर 200 शब्दों का निबंध लिखिए।
'जल है तो कल है' विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
‘मेरा प्रिय वैज्ञानिक’ विषय पर निबंध लेखन कीजिए।
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए।
नदी किनारे एक शाम
चरित्रात्मक निबंध: मेरा प्रिय रचनाकार
‘रेल की आत्मकथा’ विषय पर लगभग सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
‘बुरी संगति किसी को भी दिशाहीन बना सकती है’ इसपर तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
‘मोबाइल के अति उपयोग से होने वाले दुष्परिणाम’ विषय पर अपने विचार लिखिए।
‘देश की उन्नति में युवाओं का योगदान’ विषय पर अपने विचारों की मौखिक तथा लिखित अभिव्यक्ति कीजिए।
‘संगणक की आत्मकथा’ इस विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
‘युवापीढ़ी का उत्तरदायित्व’ विषय पर लगभग सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
निम्नलिखित एक विषय पर लगभग ८० से १०० शब्दों में निबंध लिखिए:
पुस्तक की आत्मकथा
निम्नलिखित विषय पर लगभग ८० से १०० शब्दों में निबंध लिखिए:
पर्यावरण संतुलन
निम्नलिखित दिए गए शीर्षक पर लगभग 150 शब्दों में रचनात्मक लेखन लिखिए।
बारिश की वह सबुह
निम्नलिखित दिए गए शीर्षक पर लगभग 150 शब्दों में रचनात्मक लेखन लिखिए।
मेरे बगीचे में खिला गुलाब
निम्नलिखित दिए गए शीर्षक पर लगभग 150 शब्दों में रचनात्मक लेखन लिखिए।
विद्यालय में मेरा प्रिय कोना
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
मेरा प्रिय त्योहार
निम्नलिखित विषय पर 60 से 70 शब्दों में निबंध लिखिए:
मैं पेड़ बोल रहा हूँ ...
निम्नलिखित विषय पर लगभग 70 से 80 शब्दों में निबंध लिखिए:
मैं पृथ्वी बोल रही हूँ...
निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’
नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका
निबंध लिखिए -
भ्रष्टाचार
निबंध लिखिए:
वृक्षारोपण
निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।
एक वीर सिपाही का सपना
निबंध लिखिए-
यदि इंटरनेट (अंतरजाल) न होता....
निबंध लिखिए-
विद्यार्थी और अनुशासन
निबंध लिखिए-
आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।
निबंध लिखिए -
यदि मैं प्रधानमंत्री होता।
निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए।
मेरा प्रिय खेल
निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
फटी पुस्तक की आत्मकथा
दैनंदिनी (डायरी) तुमच्याशी बोलत आहे, अशी कल्पना करून तिचे आत्मकथन पुढील मुद्द्यांचा उपयोग करून लिहा.
- निर्मिती
- महत्त्व
- उपयोग
- इतरांची भावना
- आनंद
- खंत
पुढील घटक (फूल) तुमच्याशी बोलत आहे, अशी कल्पना करून त्या घटकाचे (फुलाचे) आत्मवृत्त लिहा.

रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा लिखित ‘गेंहूँ बनाम गुलाब’ निबंध पढ़िए और उसका आकलन कीजिए ।
‘यदि मैं शिक्षा मंत्री होता -----’ विषय पर लगभग सौ शब्दों में निबंध लिखिए।
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:
यदि पुस्तकें न होती........
वर्णनात्मक -

