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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ९ वी

वैचारिक निबंध: अकाल: एक भीषण समस्या

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प्रश्न

वैचारिक निबंध: अकाल: एक भीषण समस्या

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

अकाल: एक भीषण समस्या 

     पर्यावरण का संतुलन ही संतुलित जीवन का आधार है। जो प्रकृति जीवन देती है, उसे पोषित करती है; वही प्रकृति गुस्सा हो जाने पर मृत्यु का कारण भी बन जाती है। अति और अल्प ही समस्त समस्या का मूल है। एक तरफ जल की अति होने पर बाढ़, तो दूसरी ओर जल की अल्पता से अकाल की स्थिति निर्मित हो जाती है। यह असंतुलन प्रकृति में प्राकृतिक ढंग से नहीं होता है। इसके जिम्मेदार मुख्य रूप से मनुष्य ही हैं।

     कई दशकों और सदियों से मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए वृक्षों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक जलस्रोतों को नष्ट कर रहा है। बड़े तालाबों को बांटकर, ऊँचे पर्वतों को काटकर, और घने, सुंदर वनों पर अतिक्रमण कर नए-नए घर, बंगले और इमारतें बनाने की महत्वाकांक्षाएँ ही कई प्राकृतिक समस्याओं को जन्म दे रही हैं, जिससे पर्यावरण का जीवनचक्र प्रभावित हो रहा है।

     अकाल का एक प्रमुख कारण वर्षा का न होना है, और इसका कारण है मानवीय अतिक्रमण। वन-संपदा के निरंतर नाश के कारण समय पर वर्षा नहीं होती, जिससे अकाल की भयावहता चरम पर पहुँच जाती है। खेतों में फसल नहीं उगाई जा सकती, और ऐसे में पेट भरने व जीवित रहने के लिए अन्न उपलब्ध नहीं होता है। इससे मनुष्यों और जानवरों में हाहाकार मच जाता है।

     आज के समय में, मनुष्य को प्रकृति के पतन का अपराधबोध हो रहा है। वह हर स्तर पर अकाल की समस्या को रोकने की कोशिश कर रहा है, और ऐसी समस्या उत्पन्न होने पर उससे निपटने का प्रयास कर रहा है। न केवल देश की सरकार, बल्कि जागरूक और शिक्षित नागरिक भी इसमें योगदान दे रहे हैं। सरकारी योजनाओं के तहत बड़े-बड़े तालाब खुदवाए जा रहे हैं, नहरें बनाई जा रही हैं, और नदियों पर बाँध बनाकर जल संवर्धन किया जा रहा है।

     जन जागरूकता और पर्यावरण संबंधी नए कानूनों के कारण न केवल वन-संपदा का संरक्षण हो रहा है, बल्कि समग्र पर्यावरण का संतुलन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम भविष्य में सकारात्मक होगा, और शायद हमें फिर कभी अकाल की भीषणता का सामना नहीं करना पड़ेगा। यदि पूरा भारत प्राकृतिक आपदाओं से मुक्त रहता है, तो देश विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ता रहेगा।

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निबंध लेखन
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पाठ 4: रचना विभाग - निबंध लेखन [पृष्ठ ८८]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Lokbharati Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 4 रचना विभाग
निबंध लेखन | Q (२) १. | पृष्ठ ८८
बालभारती Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 2.14 रचना एवं व्याकरण विभाग
स्वाध्याय | Q (२) | पृष्ठ ११८

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