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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

निम्नलिखित विषय पर 60 से 70 शब्दों में निबंध लिखिए: मैं पेड़ बोल रहा हूँ ...

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Question

निम्नलिखित विषय पर 60 से 70 शब्दों में निबंध लिखिए:

मैं पेड़ बोल रहा हूँ ...

Writing Skills
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Solution

मैं पेड़ बोल रहा हूँ ...

अरे, अरे! जरा अपनी कुल्हाड़ी को रोकिए! आप क्यों मेरा नाश करने पर तुले हुए हैं? मैं तो आपका मित्र हूँ। मैं ईश्वर द्वारा इस प्रकृति को दिया गया एक अमूल्य वरदान हूँ। मैं ही इस सम्पूर्ण जगत में घटित होने वाली समस्त प्राकृतिक घटनाओं का प्रमुख कारण हूँ। इस संसार के सभी जीव जंतुओं के जीवन का आधार मैं ही हूँ। इस पृथ्वी पर सबसे पहले मेरा ही जन्म हुआ था। अपने जन्म से पहले जब मैं पृथ्वी के भूगर्भ में एक बीज के रूप में सुप्तावस्था में पड़ा हुआ था, तब मैंने पृथ्वी के भूगर्भ में उपस्थित जल एवं खनिज तत्वों से अपना पोषण करके स्वयं का विकास किया और इस धरती के भूगर्भ से बाहर एक तने के रूप में आ गया। धरती की ऊपरी सतह फोड़कर बाहर निकला तो इस संसार को देखकर चकित रह गया। धीरे-धीरे विकसित होकर मैं हरा-भरा वृक्ष बन गया और आप सबकी सेवा करने लगा।

हम पेड़ अपनी जड़ों से जो पानी सोखते हैं, उसका बहुत बड़ा भाग पत्तियों द्वारा भाप बनाकर वायुमंडल में उड़ा देते हैं। इससे वातावरण की नमी में वृद्धि होती है और वर्षा की मात्रा बढ़ती है। हम कार्बन डाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन छोड़ते हैं। मैं प्रकृति और पर्यावरण को संतुलित रखता हूँ। मैं मनुष्य को फल, छाया, लकड़ी और औषधि देता हूँ। मेरे साये के नीचे लोग गर्मियों के समय बैठते है और मैं उनकी थकान दूर कर देता हूँ। मेरे लहलहाते पत्तों की हवा से मनुष्य को सुकून मिलता है। मैं हर मौसम में यूँ ही खड़ा रहता हूँ, मुझ पर अनेक पक्षी अपना घर बनाकर रहते हैं लेकिन पतझड़ के मौसम में मैं वीरान हो जाता हूँ तब मेरे पत्ते सूख कर गिर जाते हैं लेकिन कुछ समय बाद नए पत्ते आते हैं और मैं फिर से हरा-भरा हो जाता हूँ।

मुझे हमेशा भय रहता है कि कोई मुझे काट ना दे। पशुओं मेरे पत्तो को खाते है। मुझे हमेशा यह डर सताता है कि कोई मुझे नुकसान ना पहुँचाए। यह डर तब अधिक लगता था जब मैं सिर्फ एक पौधा था। जिस तरीके से मेरे मित्र वृक्षों को हर दिन काटा जा रहा है, मुझे भी कटने का डर रहता है। मैं हूँ तो वर्षा होती है। अगर मुझे और मेरे साथी वृक्षों को ऐसे ही काटा गया तो वह दिन दूर नहीं कि पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाएगा। ईश्वर ने मुझे प्रकृति और सभी प्राणियों की सेवा के लिए भेजा है। सभी प्राणी जीवित रहे इसलिए मुझे भेजा गया है। मैं एक अनमोल उपहार हूँ जिसकी कदर मनुष्य कर नहीं रहे हैं। 

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निबंध लेखन
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