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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए: 'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?

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Question

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?

Short/Brief Note
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Solution

कवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कविता 'मनुष्यता' में मनुष्य को मृत्यु से ना डरने का संदेश दिया है। उनका मानना है कि यह शरीर नष्ट होने ही वाला है, और आत्मा अमर है, इसलिए मृत्यु से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। हर मनुष्य को समयानुसार मृत्यु का सामना करना पड़ता है, इसलिए उसे अपने जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए जो उसे बाद में भी याद रखा जा सके। उसकी मृत्यु व्यर्थ न जाए और उसकी याद सदैव अमर रहे।

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मनुष्यता
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2022-2023 (March) Outside Delhi Set 2

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?


‘मनुष्य मात्र बंधु है’ से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?


निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?


‘परोपकार’ विषय पर आधारित दो कविताओं और दो दोहों का संकलन कीजिए। उन्हें कक्षा में सुनाइए।


अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध’ की कविता ‘कर्मवीर’ तथा अन्य कविताओं को पढ़िए तथा कक्षा में सुनाइए।


भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।


कवि किसके जीने और मरने को एक समान बताता है?


“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


कवि ने महाविभूति किसे कहा है और क्यों?


‘रहो न यों कि एक से न काम और का सरे’ के माध्यम से कवि क्या सीख देना चाहता है?


‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?


‘मनुष्यता’ कविता में वर्णित उशीनर, दधीचि और कर्ण के उन कार्यों का उल्लेख कीजिए जिससे वे मनुष्य को मनुष्यता की राह दिखा गए।


निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

चलो अमीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पढ़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे

  1. कवि सभी को एक होकर चलने की प्रेरणा देते हैं। इससे ज्ञात होता है कि कवि ______ के पक्षघर हैं।
    (क) निरन्वय
    (ख) समन्वय
    (ग) क्रमान्वय
    (घ) दूरान्वय

  2. अभीष्ट मार्ग से तात्पर्य है-
    (क) स्वर्गगत मार्ग
    (ख) प्रमाणित मार्ग
    (ग) क्रीड़ाक्षेत्रीय मार्ग
    (घ) मनोवांछित मार्ग

  3. समर्थ भाव है, दूसरों को
    (क) सफल करते हुए स्वयं सफल होना
    (ख) ज्ञान मार्ग बताते हुए सफल बनाना
    (ग) शक्ति प्रदर्शन द्वारा सफलता दिलाना
    (घ) सफल करते हुए अपना स्वार्थ सिद्ध करना

  4. 'भिन्‍नता ना बढ़े' का आशय है-
    (क) मत भिन्नता हो
    (ख) मतभेद कम हों
    (ग) भेदभाव भिन्न हों
    (घ) मतभेद अधिक हों

  5. निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
  1. हमें मृत्यु से कभी नहीं डरना चाहिए ।
  2. बाहय आडंबरों का विरोध करना चाहिए।
  3. मार्ग की विपत्तियों को ढकेलते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
  4. प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।
  5. हमें अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

    पदयांश से मेल खाते वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए -

    (क) (i), (ii), (v)
    (ख) (i), (iii), (v)
    (ग)  (ii), (iii), (iv)
    (घ)  (ii), (iv), (v)

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:

‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सबको साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।


निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।


पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -

“घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी” - 'मनुष्यता' कविता से ली गई इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने जीवन रूपी मार्ग पर आगे बढ़ते समय क्‍या याद रखने को कहा है और क्यों?


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