Advertisements
Advertisements
Question
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?
Advertisements
Solution
कवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कविता 'मनुष्यता' में मनुष्य को मृत्यु से ना डरने का संदेश दिया है। उनका मानना है कि यह शरीर नष्ट होने ही वाला है, और आत्मा अमर है, इसलिए मृत्यु से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। हर मनुष्य को समयानुसार मृत्यु का सामना करना पड़ता है, इसलिए उसे अपने जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए जो उसे बाद में भी याद रखा जा सके। उसकी मृत्यु व्यर्थ न जाए और उसकी याद सदैव अमर रहे।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
‘विचार लो कि मर्त्य हो’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है? इसे सुमृत्यु कैसे बनाया जा सकता है?
कवि किसके जीने और मरने को एक समान बताता है?
मनुष्य किसी अन्य को अनाथ समझने की भूल कब कर बैठता है?
कवि ने महाविभूति किसे कहा है और क्यों?
अपने लिए जीने वाला कभी मरता नहीं’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
कवि ने सफलता पाने के लिए मनुष्य को किस तरह प्रयास करने के लिए कहा है?
‘मनुष्यता’ कविता में वर्णित उशीनर, दधीचि और कर्ण के उन कार्यों का उल्लेख कीजिए जिससे वे मनुष्य को मनुष्यता की राह दिखा गए।
| दुनिया भर में असहिष्णुता लगभग आम हो गई है। जाति, धर्म, रंग और वैचारिक रूप से भिन्न दृष्टिकोण रखने वाले लोगों के प्रति असहिष्णुता की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। सहिष्णुता की परिभाषा पर विचार करें तो जिस विश्वास और प्रथा को हम पसंद नहीं करते उसमें बाधा डालने की बजाय संयम बरतना ही सहिष्णुता है। |
कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा, ‘अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।’ इस पंक्ति की सार्थकता व वर्तमान समय में इसका औचित्य स्थापित कीजिए।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-
|
चलो अमीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए, |
- कवि सभी को एक होकर चलने की प्रेरणा देते हैं। इससे ज्ञात होता है कि कवि ______ के पक्षघर हैं।
(क) निरन्वय
(ख) समन्वय
(ग) क्रमान्वय
(घ) दूरान्वय - अभीष्ट मार्ग से तात्पर्य है-
(क) स्वर्गगत मार्ग
(ख) प्रमाणित मार्ग
(ग) क्रीड़ाक्षेत्रीय मार्ग
(घ) मनोवांछित मार्ग - समर्थ भाव है, दूसरों को
(क) सफल करते हुए स्वयं सफल होना
(ख) ज्ञान मार्ग बताते हुए सफल बनाना
(ग) शक्ति प्रदर्शन द्वारा सफलता दिलाना
(घ) सफल करते हुए अपना स्वार्थ सिद्ध करना - 'भिन्नता ना बढ़े' का आशय है-
(क) मत भिन्नता हो
(ख) मतभेद कम हों
(ग) भेदभाव भिन्न हों
(घ) मतभेद अधिक हों - निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
- हमें मृत्यु से कभी नहीं डरना चाहिए ।
- बाहय आडंबरों का विरोध करना चाहिए।
- मार्ग की विपत्तियों को ढकेलते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
- प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।
- हमें अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
पदयांश से मेल खाते वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए -
(क) (i), (ii), (v)
(ख) (i), (iii), (v)
(ग) (ii), (iii), (iv)
(घ) (ii), (iv), (v)
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:
| विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए, मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए। वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।। |
- कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए? [1]
- मृत्यु से यश प्राप्त होता है
- जन्म - मरण ईश्वर के हाथ में है
- मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
- मृत्यु तो अवश्यंभावी है
- कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है? [1]
- बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
- अपनों के हित प्राप्त होनेवाली मृत्यु
- महान उद्देश्य के लिए मरनेवाले की मृत्यु
- स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
- कैसी मृत्यु व्यर्थ है? [1]
- देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
- जिस मृत्यु को याद न किया जाए
- दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
- मृत्यु के बाद हमेशा याद रहे
- पशु प्रवृत्ति क्या है? [1]
- अपने लिए जीना - खाना
- दूसरों के लिए जीना - खाना
- परोपकार का भाव रखना
- दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
- कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं? [1]
- उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
- पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए।
- मनुष्य जीवन की सार्थकता पररोपकार में है।
- जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है।
विकल्प:- केवल I
- II, IV
- I, III
- II, III
