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“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है? - Hindi Course - B

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Question

“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

Short/Brief Note
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Solution

अखंड आत्मभाव भरने के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि लोग एक-दूसरे से वैमनस्य, ईष्र्या, द्वेष आदि भाव न रखें और सारी दुनिया के लोगों के साथ एकता अखंडता बनाए रखने हेतु सभी को अपना भाई मानें। प्रायः लोग जाति-धर्म, भाषा क्षेत्रवाद, संप्रदाय आदि की संकीर्णता में फँसकर मनुष्य को भाई समझना तो दूर मनुष्य भी नहीं समझते हैं। कवि इसी संकीर्णता का त्याग करने और सभी के साथ आत्मीयता बनाने की बात कर रहा है।

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मनुष्यता
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RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने दधीचि कर्णआदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?


निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
सहानुभूति चाहिएमहाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?


अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।


भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।


कवि किसके जीने और मरने को एक समान बताता है?


मनुष्य किसी अन्य को अनाथ समझने की भूल कब कर बैठता है?


हमें किसी को अनाथ क्यों नहीं समझना चाहिए?


‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?


‘मनुष्यता’ कविता में वर्णित उशीनर, दधीचि और कर्ण के उन कार्यों का उल्लेख कीजिए जिससे वे मनुष्य को मनुष्यता की राह दिखा गए।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:

‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सबको साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।


निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों?


निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी।
हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।
वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।
  1. कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए?   [1]
    1. मृत्यु से यश प्राप्त होता है
    2. जन्म - मरण ईश्वर के हाथ में है
    3. मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
    4. मृत्यु तो अवश्यंभावी है
  2. कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है?    [1]
    1. बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
    2. अपनों के हित प्राप्त होनेवाली मृत्यु
    3. महान उद्देश्य के लिए मरनेवाले की मृत्यु
    4. स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
  3. कैसी मृत्यु व्यर्थ है?    [1]
    1. देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
    2. जिस मृत्यु को याद न किया जाए
    3. दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
    4. मृत्यु के बाद हमेशा याद रहे
  4. पशु प्रवृत्ति क्या है?    [1]
    1. अपने लिए जीना - खाना
    2. दूसरों के लिए जीना - खाना
    3. परोपकार का भाव रखना
    4. दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
  5. कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं?    [1]
    1. उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
    2. पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए।
    3. मनुष्य जीवन की सार्थकता पररोपकार में है।
    4. जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है।
      विकल्प:
      1. केवल I
      2. II, IV
      3. I, III
      4. II, III

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