Advertisements
Advertisements
Question
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सबको साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Advertisements
Solution
'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि ने सभी को साथ लेकर चलने की प्रेरणा दी है, क्योंकि सभी मनुष्य एक ही परमपिता परमेश्वर की संतान हैं। कवि का मानना है कि एक-दूसरे का साथ देने से कठिनाइयाँ आसान हो जाती हैं।
मनुष्य को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के हित के लिए सोचना चाहिए। अपने पौरुष, बुद्धि, बल, धन आदि का उपयोग सबके उत्थान के लिए करना चाहिए। सबको साथ लेकर चलना ही सच्चे और समर्थवान व्यक्ति की पहचान है। यही समाज और देश की उन्नति का मार्ग है।
RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।
अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।
‘विचार लो कि मर्त्य हो’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है? इसे सुमृत्यु कैसे बनाया जा सकता है?
“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
मनुष्य किसी अन्य को अनाथ समझने की भूल कब कर बैठता है?
उशीनर कौन थे? उनके परोपकार का वर्णन कीजिए।
‘रहो न यों कि एक से न काम और का सरे’ के माध्यम से कवि क्या सीख देना चाहता है?
‘मनुष्यता’ कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
‘मनुष्यता’ कविता में वर्णित उशीनर, दधीचि और कर्ण के उन कार्यों का उल्लेख कीजिए जिससे वे मनुष्य को मनुष्यता की राह दिखा गए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:
| विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए, मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए। वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।। |
- कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए? [1]
- मृत्यु से यश प्राप्त होता है
- जन्म - मरण ईश्वर के हाथ में है
- मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
- मृत्यु तो अवश्यंभावी है
- कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है? [1]
- बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
- अपनों के हित प्राप्त होनेवाली मृत्यु
- महान उद्देश्य के लिए मरनेवाले की मृत्यु
- स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
- कैसी मृत्यु व्यर्थ है? [1]
- देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
- जिस मृत्यु को याद न किया जाए
- दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
- मृत्यु के बाद हमेशा याद रहे
- पशु प्रवृत्ति क्या है? [1]
- अपने लिए जीना - खाना
- दूसरों के लिए जीना - खाना
- परोपकार का भाव रखना
- दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
- कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं? [1]
- उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
- पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए।
- मनुष्य जीवन की सार्थकता पररोपकार में है।
- जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है।
विकल्प:- केवल I
- II, IV
- I, III
- II, III
