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‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?

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Question

‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?

Short/Brief Note
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Solution

‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य को यह बताने का प्रयास किया है कि सभी मनुष्य आपस में ई ई हैं। इस सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि सबको जन्म देने वाला ईश्वर एक है। पुराणों में भी इस बात के प्रमाण हैं कि सृष्टि का रचनाकार वही एक है। वह सारे जगत का अजन्मा पिता है। फिर मनुष्य-मनुष्य में थोड़ा-बहुत जो भेद है। वह उसके अपने कर्मों के कारण है परंतु एक ही ईश्वर या आत्मा का अंश उनमें समाए होने के कारण सभी एक हैं। इतना जानने के बाद भी कोई मनुष्य दूसरे मनुष्य की अर्थात् अपने भाई की मदद न करे और उसकी व्यथा दूर न करे तो वह सबसे बड़े अनर्थ हैं। इसका कारण यह है कि ऐसा न करके मनुष्य अपनी मनुष्यता को कलंकित करता है।

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मनुष्यता
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Chapter 1.4: मनुष्यता - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.4 मनुष्यता
अतिरिक्त प्रश्न | Q 11

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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने दधीचि कर्णआदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिएइस कविता के आधार पर लिखिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
'मनुष्यताकविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?


निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
सहानुभूति चाहिएमहाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?


निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँत्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।


निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्तिविघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँबढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।


अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध’ की कविता ‘कर्मवीर’ तथा अन्य कविताओं को पढ़िए तथा कक्षा में सुनाइए।


भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।


कवि किसके जीने और मरने को एक समान बताता है?


“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


मनुष्य किसी अन्य को अनाथ समझने की भूल कब कर बैठता है?


हमें किसी को अनाथ क्यों नहीं समझना चाहिए?


कवि ने महाविभूति किसे कहा है और क्यों?


‘मनुष्यता’ कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।


‘मनुष्यता’ कविता में वर्णित उशीनर, दधीचि और कर्ण के उन कार्यों का उल्लेख कीजिए जिससे वे मनुष्य को मनुष्यता की राह दिखा गए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।


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