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प्रश्न
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?
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उत्तर
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य को यह बताने का प्रयास किया है कि सभी मनुष्य आपस में ई ई हैं। इस सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि सबको जन्म देने वाला ईश्वर एक है। पुराणों में भी इस बात के प्रमाण हैं कि सृष्टि का रचनाकार वही एक है। वह सारे जगत का अजन्मा पिता है। फिर मनुष्य-मनुष्य में थोड़ा-बहुत जो भेद है। वह उसके अपने कर्मों के कारण है परंतु एक ही ईश्वर या आत्मा का अंश उनमें समाए होने के कारण सभी एक हैं। इतना जानने के बाद भी कोई मनुष्य दूसरे मनुष्य की अर्थात् अपने भाई की मदद न करे और उसकी व्यथा दूर न करे तो वह सबसे बड़े अनर्थ हैं। इसका कारण यह है कि ऐसा न करके मनुष्य अपनी मनुष्यता को कलंकित करता है।
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(क) निरन्वय
(ख) समन्वय
(ग) क्रमान्वय
(घ) दूरान्वय - अभीष्ट मार्ग से तात्पर्य है-
(क) स्वर्गगत मार्ग
(ख) प्रमाणित मार्ग
(ग) क्रीड़ाक्षेत्रीय मार्ग
(घ) मनोवांछित मार्ग - समर्थ भाव है, दूसरों को
(क) सफल करते हुए स्वयं सफल होना
(ख) ज्ञान मार्ग बताते हुए सफल बनाना
(ग) शक्ति प्रदर्शन द्वारा सफलता दिलाना
(घ) सफल करते हुए अपना स्वार्थ सिद्ध करना - 'भिन्नता ना बढ़े' का आशय है-
(क) मत भिन्नता हो
(ख) मतभेद कम हों
(ग) भेदभाव भिन्न हों
(घ) मतभेद अधिक हों - निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
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- मार्ग की विपत्तियों को ढकेलते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
- प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।
- हमें अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
पदयांश से मेल खाते वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए -
(क) (i), (ii), (v)
(ख) (i), (iii), (v)
(ग) (ii), (iii), (iv)
(घ) (ii), (iv), (v)
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