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निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँत्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।

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उत्तर

कवि का कहना है कि मनुष्य को कभी भी धन पर घमंड नहीं करना चाहिए। कुछ लोग धन प्राप्त होने पर स्वयं को सुरक्षित व सनाथ समझने लगते हैं। परन्तु उन्हें सदा सोचना चाहिए कि इस दुनिया में कोई अनाथ नहीं है। सभी पर ईश्वर की कृपा दृष्टि है। ईश्वर सभी को समान भाव से देखता है। हमें उस पर भरोसा रखना चाहिए।

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मनुष्यता
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अध्याय 1.4: मनुष्यता - प्रश्न-अभ्यास (ख) [पृष्ठ २२]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 [English] Class 10
अध्याय 1.4 मनुष्यता
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 2 | पृष्ठ २२

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