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“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

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प्रश्न

“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

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उत्तर

अखंड आत्मभाव भरने के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि लोग एक-दूसरे से वैमनस्य, ईष्र्या, द्वेष आदि भाव न रखें और सारी दुनिया के लोगों के साथ एकता अखंडता बनाए रखने हेतु सभी को अपना भाई मानें। प्रायः लोग जाति-धर्म, भाषा क्षेत्रवाद, संप्रदाय आदि की संकीर्णता में फँसकर मनुष्य को भाई समझना तो दूर मनुष्य भी नहीं समझते हैं। कवि इसी संकीर्णता का त्याग करने और सभी के साथ आत्मीयता बनाने की बात कर रहा है।

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मनुष्यता
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अध्याय 1.4: मनुष्यता - अतिरिक्त प्रश्न

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 [English] Class 10
अध्याय 1.4 मनुष्यता
अतिरिक्त प्रश्न | Q 3

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