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उशीनर कौन थे? उनके परोपकार का वर्णन कीजिए।

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प्रश्न

उशीनर कौन थे? उनके परोपकार का वर्णन कीजिए।

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उत्तर

उशीनर गांधार के राजा थे। उन्हें शिवि के नाम से भी जाना जाता है। एक बार जब वे बैठे थे तभी एक कबूतर बाज से भयभीत होकर शिवि की गोद में आ दुबका। इसी बीच बाज शिवि के पास आकर अपना शिकार वापस माँगने लगा। जब राजा ने कबूतर को वापस देने से मना किया तो उसने राजा से कबूतर के वजन के बराबर माँस माँगा। राजा ने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। एक कबूतर पर दया करने के कारण राजा प्रसिद्ध हो गए।

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मनुष्यता
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.4: मनुष्यता - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
अध्याय 1.4 मनुष्यता
अतिरिक्त प्रश्न | Q 6

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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
'मनुष्य मात्र बंधु है'से आप क्या समझते हैंस्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिएइस कविता के आधार पर लिखिए।


अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।


‘परोपकार’ विषय पर आधारित दो कविताओं और दो दोहों का संकलन कीजिए। उन्हें कक्षा में सुनाइए।


अपने लिए जीने वाला कभी मरता नहीं’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?


‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?


‘मनुष्यता’ कविता में वर्णित उशीनर, दधीचि और कर्ण के उन कार्यों का उल्लेख कीजिए जिससे वे मनुष्य को मनुष्यता की राह दिखा गए।


दुनिया भर में असहिष्णुता लगभग आम हो गई है। जाति, धर्म, रंग और वैचारिक रूप से भिन्न दृष्टिकोण रखने वाले लोगों के प्रति असहिष्णुता की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। सहिष्णुता की परिभाषा पर विचार करें तो जिस विश्वास और प्रथा को हम पसंद नहीं करते उसमें बाधा डालने की बजाय संयम बरतना ही सहिष्णुता है।

कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा, ‘अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।’ इस पंक्ति की सार्थकता व वर्तमान समय में इसका औचित्य स्थापित कीजिए।


निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

चलो अमीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पढ़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे

  1. कवि सभी को एक होकर चलने की प्रेरणा देते हैं। इससे ज्ञात होता है कि कवि ______ के पक्षघर हैं।
    (क) निरन्वय
    (ख) समन्वय
    (ग) क्रमान्वय
    (घ) दूरान्वय

  2. अभीष्ट मार्ग से तात्पर्य है-
    (क) स्वर्गगत मार्ग
    (ख) प्रमाणित मार्ग
    (ग) क्रीड़ाक्षेत्रीय मार्ग
    (घ) मनोवांछित मार्ग

  3. समर्थ भाव है, दूसरों को
    (क) सफल करते हुए स्वयं सफल होना
    (ख) ज्ञान मार्ग बताते हुए सफल बनाना
    (ग) शक्ति प्रदर्शन द्वारा सफलता दिलाना
    (घ) सफल करते हुए अपना स्वार्थ सिद्ध करना

  4. 'भिन्‍नता ना बढ़े' का आशय है-
    (क) मत भिन्नता हो
    (ख) मतभेद कम हों
    (ग) भेदभाव भिन्न हों
    (घ) मतभेद अधिक हों

  5. निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
  1. हमें मृत्यु से कभी नहीं डरना चाहिए ।
  2. बाहय आडंबरों का विरोध करना चाहिए।
  3. मार्ग की विपत्तियों को ढकेलते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
  4. प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।
  5. हमें अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

    पदयांश से मेल खाते वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए -

    (क) (i), (ii), (v)
    (ख) (i), (iii), (v)
    (ग)  (ii), (iii), (iv)
    (घ)  (ii), (iv), (v)

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:

‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सबको साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।


निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।


पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -

“घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी” - 'मनुष्यता' कविता से ली गई इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने जीवन रूपी मार्ग पर आगे बढ़ते समय क्‍या याद रखने को कहा है और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।


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