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“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

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प्रश्न

“अखंड आत्मभाव भरने’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

टीपा लिहा
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उत्तर

अखंड आत्मभाव भरने के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि लोग एक-दूसरे से वैमनस्य, ईष्र्या, द्वेष आदि भाव न रखें और सारी दुनिया के लोगों के साथ एकता अखंडता बनाए रखने हेतु सभी को अपना भाई मानें। प्रायः लोग जाति-धर्म, भाषा क्षेत्रवाद, संप्रदाय आदि की संकीर्णता में फँसकर मनुष्य को भाई समझना तो दूर मनुष्य भी नहीं समझते हैं। कवि इसी संकीर्णता का त्याग करने और सभी के साथ आत्मीयता बनाने की बात कर रहा है।

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मनुष्यता
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.4: मनुष्यता - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 [English] Class 10
पाठ 1.4 मनुष्यता
अतिरिक्त प्रश्न | Q 3

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दुनिया भर में असहिष्णुता लगभग आम हो गई है। जाति, धर्म, रंग और वैचारिक रूप से भिन्न दृष्टिकोण रखने वाले लोगों के प्रति असहिष्णुता की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। सहिष्णुता की परिभाषा पर विचार करें तो जिस विश्वास और प्रथा को हम पसंद नहीं करते उसमें बाधा डालने की बजाय संयम बरतना ही सहिष्णुता है।

कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा, ‘अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।’ इस पंक्ति की सार्थकता व वर्तमान समय में इसका औचित्य स्थापित कीजिए।


निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

चलो अमीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पढ़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे

  1. कवि सभी को एक होकर चलने की प्रेरणा देते हैं। इससे ज्ञात होता है कि कवि ______ के पक्षघर हैं।
    (क) निरन्वय
    (ख) समन्वय
    (ग) क्रमान्वय
    (घ) दूरान्वय

  2. अभीष्ट मार्ग से तात्पर्य है-
    (क) स्वर्गगत मार्ग
    (ख) प्रमाणित मार्ग
    (ग) क्रीड़ाक्षेत्रीय मार्ग
    (घ) मनोवांछित मार्ग

  3. समर्थ भाव है, दूसरों को
    (क) सफल करते हुए स्वयं सफल होना
    (ख) ज्ञान मार्ग बताते हुए सफल बनाना
    (ग) शक्ति प्रदर्शन द्वारा सफलता दिलाना
    (घ) सफल करते हुए अपना स्वार्थ सिद्ध करना

  4. 'भिन्‍नता ना बढ़े' का आशय है-
    (क) मत भिन्नता हो
    (ख) मतभेद कम हों
    (ग) भेदभाव भिन्न हों
    (घ) मतभेद अधिक हों

  5. निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
  1. हमें मृत्यु से कभी नहीं डरना चाहिए ।
  2. बाहय आडंबरों का विरोध करना चाहिए।
  3. मार्ग की विपत्तियों को ढकेलते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
  4. प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।
  5. हमें अपने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

    पदयांश से मेल खाते वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए -

    (क) (i), (ii), (v)
    (ख) (i), (iii), (v)
    (ग)  (ii), (iii), (iv)
    (घ)  (ii), (iv), (v)

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:

‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सबको साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।


निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।


पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -

“घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी” - 'मनुष्यता' कविता से ली गई इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने जीवन रूपी मार्ग पर आगे बढ़ते समय क्‍या याद रखने को कहा है और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?


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