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प्रश्न
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?
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उत्तर
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य को यह बताने का प्रयास किया है कि सभी मनुष्य आपस में ई ई हैं। इस सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि सबको जन्म देने वाला ईश्वर एक है। पुराणों में भी इस बात के प्रमाण हैं कि सृष्टि का रचनाकार वही एक है। वह सारे जगत का अजन्मा पिता है। फिर मनुष्य-मनुष्य में थोड़ा-बहुत जो भेद है। वह उसके अपने कर्मों के कारण है परंतु एक ही ईश्वर या आत्मा का अंश उनमें समाए होने के कारण सभी एक हैं। इतना जानने के बाद भी कोई मनुष्य दूसरे मनुष्य की अर्थात् अपने भाई की मदद न करे और उसकी व्यथा दूर न करे तो वह सबसे बड़े अनर्थ हैं। इसका कारण यह है कि ऐसा न करके मनुष्य अपनी मनुष्यता को कलंकित करता है।
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निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:
| विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए, मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए। वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।। |
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- बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
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- जिस मृत्यु को याद न किया जाए
- दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
- मृत्यु के बाद हमेशा याद रहे
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- दूसरों के लिए जीना - खाना
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- दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
- कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं? [1]
- उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
- पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए।
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विकल्प:- केवल I
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- I, III
- II, III
