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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।
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उत्तर
'मनुष्यता' कविता में मैथिलीशरण गुप्त ने भाग्यहीन व्यक्ति को उसे माना है जो धैर्यवान नहीं है। यानी वह व्यक्ति जिसमें धीरज धारण करने की क्षमता नहीं है, भाग्यहीन है। वह व्यक्ति बिल्कुल भाग्यहीन है, जो धैर्य धारण की क्षमता नहीं रखता। जिसके आचरण में सैदव अधीरता रहती है, वह व्यक्ति भाग्यहीन है। सच्चा मनुष्य वही है जो किसी मनुष्य के काम आए।
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