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निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?

टीपा लिहा
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उत्तर

कवि ने एक दूसरे के प्रति सहानुभूति की भावना को उभारा है। इससे बढ़कर कोई पूँजी नहीं है। यदि प्रेम, सहानुभूति, करुणा के भाव हो तो वह जग को जीत सकता है। वह सम्मानित भी रहता है। महात्मा बुद्ध के विचारों का भी विरोध हुआ था परन्तु जब बुद्ध ने अपनी करुणा, प्रेम व दया का प्रवाह किया तो उनके सामने सब नतमस्तक हो गए।

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मनुष्यता
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.4: मनुष्यता - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १७]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 1.4 मनुष्यता
प्रश्न-अभ्यास | Q (ख) 1. | पृष्ठ १७

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