Advertisements
Advertisements
Question
निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?
Advertisements
Solution
कवि ने एक दूसरे के प्रति सहानुभूति की भावना को उभारा है। इससे बढ़कर कोई पूँजी नहीं है। यदि प्रेम, सहानुभूति, करुणा के भाव हो तो वह जग को जीत सकता है। वह सम्मानित भी रहता है। महात्मा बुद्ध के विचारों का भी विरोध हुआ था परन्तु जब बुद्ध ने अपनी करुणा, प्रेम व दया का प्रवाह किया तो उनके सामने सब नतमस्तक हो गए।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।
निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध’ की कविता ‘कर्मवीर’ तथा अन्य कविताओं को पढ़िए तथा कक्षा में सुनाइए।
भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।
हमें किसी को अनाथ क्यों नहीं समझना चाहिए?
अपने लिए जीने वाला कभी मरता नहीं’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
कवि ने सफलता पाने के लिए मनुष्य को किस तरह प्रयास करने के लिए कहा है?
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?
| दुनिया भर में असहिष्णुता लगभग आम हो गई है। जाति, धर्म, रंग और वैचारिक रूप से भिन्न दृष्टिकोण रखने वाले लोगों के प्रति असहिष्णुता की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। सहिष्णुता की परिभाषा पर विचार करें तो जिस विश्वास और प्रथा को हम पसंद नहीं करते उसमें बाधा डालने की बजाय संयम बरतना ही सहिष्णुता है। |
कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा, ‘अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।’ इस पंक्ति की सार्थकता व वर्तमान समय में इसका औचित्य स्थापित कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों?
