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‘मनुष्यता’ कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

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Question

‘मनुष्यता’ कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

Short/Brief Note
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Solution

मनुष्यता कविता हमें सच्चा मनुष्य बनने की राह दिखाती है। मनुष्य को इस कविता द्वारा सभी मनुष्यों के अपना भाई मानने, उनकी भलाई करने और एकता बनाकर रखने की सीख दी गई है। कविता के अनुसार सच्चा मनुष्य वही है जो सभी को अपना समझते हुए दूसरों की भलाई के लिए ही जीता और मरता है। वह दूसरों के साथ उदारता से रहता है और मानवीय एकता को दृढ़ करने के लिए प्रयासरत रहता है। वह खुद उन्नति के पथ पर चलकर दूसरों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। वर्तमान में इस कविता की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है क्योंकि आज दुनिया में स्वार्थवृत्ति, अहंकार, लोभ, ईर्ष्या, छल-कपट आदि बढ़ रहा है जिससे मनुष्य-मनुष्य में दूरी बढ़ रही है।

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मनुष्यता
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने दधीचि कर्ण, आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?


‘मनुष्य मात्र बंधु है’ से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?


निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
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अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध’ की कविता ‘कर्मवीर’ तथा अन्य कविताओं को पढ़िए तथा कक्षा में सुनाइए।


‘विचार लो कि मर्त्य हो’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है? इसे सुमृत्यु कैसे बनाया जा सकता है?


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अपने लिए जीने वाला कभी मरता नहीं’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?


पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -

“घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी” - 'मनुष्यता' कविता से ली गई इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने जीवन रूपी मार्ग पर आगे बढ़ते समय क्‍या याद रखने को कहा है और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।


निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी।
हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।
वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।
  1. कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए?   [1]
    1. मृत्यु से यश प्राप्त होता है
    2. जन्म - मरण ईश्वर के हाथ में है
    3. मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
    4. मृत्यु तो अवश्यंभावी है
  2. कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है?    [1]
    1. बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
    2. अपनों के हित प्राप्त होनेवाली मृत्यु
    3. महान उद्देश्य के लिए मरनेवाले की मृत्यु
    4. स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
  3. कैसी मृत्यु व्यर्थ है?    [1]
    1. देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
    2. जिस मृत्यु को याद न किया जाए
    3. दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
    4. मृत्यु के बाद हमेशा याद रहे
  4. पशु प्रवृत्ति क्या है?    [1]
    1. अपने लिए जीना - खाना
    2. दूसरों के लिए जीना - खाना
    3. परोपकार का भाव रखना
    4. दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
  5. कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं?    [1]
    1. उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
    2. पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए।
    3. मनुष्य जीवन की सार्थकता पररोपकार में है।
    4. जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है।
      विकल्प:
      1. केवल I
      2. II, IV
      3. I, III
      4. II, III

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