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Question
निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
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Solution
कवि संदेश देता है कि हमें निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। बाधाओं, कठिनाइयों को हँसते हुए, ढकेलते हुए बढ़ना चाहिए लेकिन आपसी मेलजोल कम नहीं करना चाहिए। किसी को अलग न समझें, सभी पंथ व संप्रदाय मिलकर सभी का हित करने की बात करे, विश्व एकता के विचार को बनाए रखे।
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निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:
| विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए, मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए। वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।। |
- कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए? [1]
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- मृत्यु तो अवश्यंभावी है
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- बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
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- पशु प्रवृत्ति क्या है? [1]
- अपने लिए जीना - खाना
- दूसरों के लिए जीना - खाना
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- कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं? [1]
- उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
- पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए।
- मनुष्य जीवन की सार्थकता पररोपकार में है।
- जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है।
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- II, III
