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अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।

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Question

अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।

Answer in Brief
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Solution

रंतिदेव- भारत के प्रसिद्ध राजा थे। एक बार भीषण अकाल पड़ गया। उस अकाल से तालाब और कुएँ सूख गए। फ़सलें
सूख गईं। राजकोष में अनाज का भंडार समाप्त हो गया। दयालु राजा रतिदेव से अपनी प्रजा का दुख देखा न गया। आखिर प्रजा के सुख-दुख को वे अपना दुख जो समझते थे। उन्होंने प्रजा को अनाज देना शुरू कर दिया। प्रजा की भारी भरकम संख्या के आगे अनाज कम पड़ने लगा, जो बाद में समाप्त हो गया। राज-परिवार को भी अब अकाल के कारण आधा पेट खाकर गुजारा करना पड़ रहा था। ऐसी स्थिति आ गई कि राजा को भी कई दिनों से भोजन न मिला था। ऐसी स्थिति में जब राजा को कई दिनों बाद खाने को कुछ रोटियाँ मिलीं तभी एक भूखा व्यक्ति दरवाजे पर आ गया। राजा से उसकी भूख न देखी गई और उसे खिला दिया। ऐसी मान्यता है कि उनके कृत्य से प्रभावित होकर ईश्वर ने उनका भंडार अन्न-धन से भर दिया।

दधीचि- इनकी गणना भारत के परमदानी एवं ज्ञानी ऋषियों में की जाती है। दधीचि अत्यंत परोपकारी थे। वे तप में लीन रहते थे। उन्हीं दिनों देवराज इंद्र उनके पास आए। साधना पूर्ण होते ही दधीचि ने इंद्र से आने का कारण पूछा। इंद्र ने बताया कि ऋषिवर! आप तो जानते ही हैं कि देवता और दानवों में युद्ध छिड़ा हुआ है। इस युद्ध में दानव, देवों पर भारी साबित हो रहे हैं। देवगण हारने की कगार पर हैं। यदि कुछ उपाय न किया गया तो स्वर्गलोक के अलावा पृथ्वी पर भी दानवों का कब्जा हो जाएगा। ऋषि ने कहा, “देवराज इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? मैं तो लोगों की भलाई की कामना लिए हुए तप ही कर सकता हूँ।” इंद्र ने कहा, “मुनिवर, यदि आप अपनी हड्डियाँ दे दो तो इनसे बज्र बनाकर असुरराज वृत्तासुर को पराजित किया जा सकेगा और देवगण युद्ध जीत सकेंगे। इंद्र की बातें सुनकर दधीचि ने साँस ऊपर खींची जिससे उनका शरीर निर्जीव हो गया। उनकी हड्डियों से बने वज्र से असुर मारे गए और देवताओं की विजय हुई। अपने इस अद्भुत त्याग से दधीचि का नाम अमर हो गया।

कर्ण- यह अत्यंत पराक्रमी, वीर और दानी राजकुमार था। वह कुंती का पुत्र और अर्जुन का भाई था जो सूर्य के वरदान से पैदा हुआ था। सूर्य ने उसकी रक्षा हेतु जन्मजात कवच-कुंडल प्रदान किया था जिसके कारण उसे मारना या हराना कठिन था। कर्ण इतना दानी था कि द्वार पर आए किसी व्यक्ति को खाली हाथ नहीं लौटने देता था। महाभारत युद्ध में कर्ण ने दुर्योधन का साथ दिया। कर्ण को पराजित करने के लिए कृष्ण और इंद्र ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उससे कवच और कुंडल माँगा। कर्ण समझ गया कि यह उसे मारने के लिए रची गई एक चाल है फिर भी उसने कवच-कुंडल दान दे दिया
और अपनी मृत्यु की परवाह किए बिना अपना वचन निभाया।

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मनुष्यता
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Chapter 1.4: मनुष्यता - योग्यता विस्तार [Page 17]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.4 मनुष्यता
योग्यता विस्तार | Q 1. | Page 17

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने दधीचि कर्ण, आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।


निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।


‘परोपकार’ विषय पर आधारित दो कविताओं और दो दोहों का संकलन कीजिए। उन्हें कक्षा में सुनाइए।


भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।


कवि किसके जीने और मरने को एक समान बताता है?


मनुष्य किसी अन्य को अनाथ समझने की भूल कब कर बैठता है?


कवि ने सफलता पाने के लिए मनुष्य को किस तरह प्रयास करने के लिए कहा है?


‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने मनुष्य के किस कृत्य को अनर्थ कहा है और क्यों ?


‘मनुष्यता’ कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।


दुनिया भर में असहिष्णुता लगभग आम हो गई है। जाति, धर्म, रंग और वैचारिक रूप से भिन्न दृष्टिकोण रखने वाले लोगों के प्रति असहिष्णुता की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। सहिष्णुता की परिभाषा पर विचार करें तो जिस विश्वास और प्रथा को हम पसंद नहीं करते उसमें बाधा डालने की बजाय संयम बरतना ही सहिष्णुता है।

कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा, ‘अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।’ इस पंक्ति की सार्थकता व वर्तमान समय में इसका औचित्य स्थापित कीजिए।


निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।


पद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -

“घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्‍नता कभी” - 'मनुष्यता' कविता से ली गई इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने जीवन रूपी मार्ग पर आगे बढ़ते समय क्‍या याद रखने को कहा है और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

'मनुष्यता' कविता में भाग्यहीन किसे और क्यों कहा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।


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