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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।। सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।

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Question

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।।

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।
Short/Brief Note
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Solution

प्रस्तुत पंक्तियों में कवि प्रेमिका की अतुप्ति का वर्णन करते हैं। अपने प्रेमी के साथ उसे बहुत समय हो गया है। परन्तु अब तक वह तृप्त नहीं हो पायी है। वह जन्मों से अपने प्रियतम को निहारती रही है परन्तु हर बार उसे और देखने का ही मन करता है। नेत्रों में अतृप्ति का भाव विद्यमान है। इसी तरह वह उसकी मधुर वाणी को लंबी अवधी से सुनती आ रही है। उसके बाद भी उसके बोल नए से ही लगते हैं। उसके रूप तथा वाणी के अंदर नवीनता का समावेश है, जिस कारण मैं तृप्त ही नहीं हो पाती हूँ। 

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पद
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Chapter 1.09: विद्यापति - पद - प्रश्न-अभ्यास [Page 50]

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NCERT Hindi Antara Bhag 2 Class 12
Chapter 1.09 विद्यापति - पद
प्रश्न-अभ्यास | Q 8. (ख) | Page 50

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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-
मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-

हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रुप नरहरि, धर्यो आप सरीर।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।


उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप लिखिए-
उदाहरण − भीर − पीड़ा/कष्ट/दुख; री − की

  1. चीर –  __________
  2. बूढ़ता – __________
  3. लगास्यूँ – __________
  4. धर्यो – __________
  5. कुण्जर – __________
  6. बिन्दावन – __________
  7. रहस्यूँ – __________
  8. राखो – __________
  9. घणा – __________
  10. सरसी – __________
  11. हिवड़ा – __________
  12. कुसुम्बी – __________

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