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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।। सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।

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प्रश्न

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।।

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।
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उत्तर

प्रस्तुत पंक्तियों में कवि प्रेमिका की अतुप्ति का वर्णन करते हैं। अपने प्रेमी के साथ उसे बहुत समय हो गया है। परन्तु अब तक वह तृप्त नहीं हो पायी है। वह जन्मों से अपने प्रियतम को निहारती रही है परन्तु हर बार उसे और देखने का ही मन करता है। नेत्रों में अतृप्ति का भाव विद्यमान है। इसी तरह वह उसकी मधुर वाणी को लंबी अवधी से सुनती आ रही है। उसके बाद भी उसके बोल नए से ही लगते हैं। उसके रूप तथा वाणी के अंदर नवीनता का समावेश है, जिस कारण मैं तृप्त ही नहीं हो पाती हूँ। 

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अध्याय 1.08: विद्यापति (पद) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ५८]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 1.08 विद्यापति (पद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 8. (ख) | पृष्ठ ५८

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हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखीआप बढ़ायो चीर।
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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
बूढ़तो गजराज राख्योकाटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधरहरो म्हारी भीर।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
चाकरी में दरसण पास्यूँसुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँतीनूं बाताँ सरसी।


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