Advertisements
Advertisements
प्रश्न
गोपियाँ उद्धव को भाग्यवान मानती हैं क्योंकि -
विकल्प
गोपियाँ श्रीकृष्ण के प्रेम में लिप्त हैं, फिर भी विरह वेदना झेल रही हैं।
उद्धव श्रीकृष्ण के प्रेम-बंधन से मुक्त और अलिप्त होने के कारण विरह वेदना से भी मुक्त हैं।
उद्धव को मथुरा में श्रीकृष्ण का सान्निध्य हर समय प्राप्त है।
उद्धव ने बड़ी-बड़ी पोथियाँ पढ़कर ज्ञान अर्जित किया है।
Advertisements
उत्तर
उद्धव श्रीकृष्ण के प्रेम-बंधन से मुक्त और अलिप्त होने के कारण विरह वेदना से भी मुक्त हैं।
व्याख्या:
गोपियाँ उद्धव को भाग्यवान मानती हैं क्योंकि उद्धव श्री कृष्ण के प्रेम-बन्धन से मुक्त और अलिप्त हाने के कारण विरह वेदना से भी मुक्त हैं।
संबंधित प्रश्न
गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?
गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन-से परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं?
गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य के आधार पर ज्ञानी उद्धव को परास्त कर दिया, उनके वाक्चातुर्य की विशेषताएँ लिखिए?
ऐसी कौन-सी बात थी जिसे गोपियों को अपने मन में दबाए रखने के लिए विवश होना पड़ा?
गोपियों ने स्वयं को अबला और भोली कहा है। आपकी दृष्टि से उनका ऐसा कहना कितना उपयुक्त है?
गोपियाँ अब धैर्य क्यों रखना चाहती हैं?
दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-
मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रुप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-
मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।
उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप लिखिए-
उदाहरण − भीर − पीड़ा/कष्ट/दुख; री − की
- चीर – __________
- बूढ़ता – __________
- लगास्यूँ – __________
- धर्यो – __________
- कुण्जर – __________
- बिन्दावन – __________
- रहस्यूँ – __________
- राखो – __________
- घणा – __________
- सरसी – __________
- हिवड़ा – __________
- कुसुम्बी – __________
मीरा के पदों का संकलन करके उन पदों को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
कवयित्री मीरा ने श्रीकृष्ण को उनकी क्षमताओं का स्मरण क्यों कराया?
तीनू बाताँ सरसी’ के माध्यम से कवयित्री क्या कहना चाहती है? उसकी यह मनोकामना कैसे पूरी हुई ?
कवयित्री मीरा अपने प्रभु के सौंदर्य पर क्यों रीझी हुई हैं? स्पष्ट कीजिए।
पाठ में संकलित पदों के आधार पर मीरा की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए।
‘सेह पिरित अनुराग बखानिअ तिल-तिल नूतन होए’ से लेखक का क्या आशय है?
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए।
सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।
पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:
'सूर के पद' में प्रेम की मर्यादा का निर्वाह किसने और किस प्रकार नहीं किया?
गोपियाँ कृष्ण को हारिल की लकड़ी के समान पकड़े हैं - इसका आशय है -
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
प्रथम पद में मीरा अपने आराध्य से कैसे और क्या प्रार्थना करती हैं?
