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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए। सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।

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प्रश्न

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए।
सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।

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उत्तर

प्रस्तुत पद में नायिका का पति परदेश गया हुआ है। वह घर में अकेली है। पति से अलग होने का विरह उसे इतना सताता है कि वह अपनी सखी से कहती है कि हे सखी! पति के बिना मुझसे घर में अकेला नहीं रहा जाता है। वह आगे कहती है कि हे सखी! इस संसार में ऐसा कौन-सा मनुष्य विद्यमान है, जो किसी अन्य के कठोर दुःख पर विश्वास करे। अर्थात कोई अन्य किसी दूसरे के दुख को गहनता से नहीं समझ पाता है।  

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पद
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अध्याय 1.08: विद्यापति (पद) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ५८]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 Class 12
अध्याय 1.08 विद्यापति (पद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 8. (क) | पृष्ठ ५८

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