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प्रश्न
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
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उत्तर
रूपक अलंकार
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संबंधित प्रश्न
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
लट लटकनि मनो मत्त मधुप गन मादक मधुहि पियें।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मेरी भव-बाधा हरौ राधा नागरि सोई।
जा तन की झाईं परै, स्यामु हरित दुति होई।।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
तीन बेर खाती थीं वे तीन बेर खाती हैं।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
प्रातः नभ था बहुत नीला शंख जैसे
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
संसार की समरस्थली में धीरता।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
सुख चपला-सा, दुख घन में
उलझा है चंचल मन कुरंग।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मानो घर-घर न हो, जैसे कोई चिड़ियाघर हो।
जिसमें खूँखार जानवर आबाद हों।
अलंकार बताइए:
खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई
अलंकार बताइए:
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल
उपमा अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए।
उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग कहाँ और क्यों किया गया है? उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।
कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दैं दैं सनमान को।
अपने द्वारा इस सत्र में पढ़ी किन्हीं दो कविताओं में प्रयुक्त अलंकारों के महत्व का वर्णन कीजिए।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।
जान पड़ता है नेत्र देख बड़े-बड़े।
हीरकों में गोल नीलम हैं जड़े।।
निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:
हनुमंत की पूँछ में लग न पाई आग।
लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।
करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान।।
"कैसे कलुषित प्राण हो गए।
मानो मन पाषाण हो गए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उपप्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उपप्रकार |
| पायो जी मैंने राम रतन धन पायो | ______ | ______ |
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
ऊँची-नीची सड़क, बुढ़िया के कूबड़-सी।
नंदनवन-सी फूल उठी, छोटी-सी कुटिया मेरी।
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उप-प्रकार |
| कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय। जो खाए बौराय जग, जो पाए बौराय। |
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम पति का, नारियाँ नहीं सह सकती हैं।
“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -
“सो जनु हमरेहि माथें काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।” इस चौपाई में प्रयुक्त अलंकार है -
“पल-पल परिवर्तित प्रकृति वेश।” इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -
'उषा सुनहले तीर बरसती
जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।'
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
'देखि सुदामा की दीन-दशा करुणा करके करुणानिधि रोए,
पानी परात कौ हाथ छुऔ नहिं नैनन के जल सौं पग धोए।'
इस काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
निम्नलिखित में अलंकार है - 'मेघ आए बन-ठन के सँवर के।'
निम्नलिखित में अलंकार है - 'मनहूँ रंक निधि लूटन लागी।'
'सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी' में अलंकार है -
निम्नलिखित में उत्प्रेक्षा अलंकार है -
'सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर।' में अलंकार है -
स्तम्भ-I और स्तम्भ-II को उचित विकल्प से सुमेलित कीजिए -
| स्तम्भ-I | स्तम्भ-II | ||
| (I) | हेमकुंभ ले उषा सवेरे भरती ढुलकाती सुख मेरे। | (अ) | श्लेष अलंकार |
| (II) | हरिमुख मानो मधुर मयंक। | (ब) | उत्प्रेक्षा अलंकार |
| (III) | पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून। | (स) | मानवीकरण अलंकार |
‘माली आवत देख कर कलियाँ करैं पुकार’ - प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है -
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
उधो, मेरा हृदयतल था एक उद्यान न्यारा।
शोभा देतीं अमित उसमें कल्पना-क्यारियाँ भी।।
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात।
मनों नीलमनि शैल पर, आतप पर्यो प्रभात।।
