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प्रश्न
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
संसार की समरस्थली में धीरता।
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उत्तर
संसार की समरस्थली में धीरता। - रूपक अलंकार
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कहै कवि बेनी बेनी ब्याल की चुराई लीनी।
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जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं।
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सुख चपला-सा, दुख घन में
उलझा है चंचल मन कुरंग।
अलंकार बताइए:
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो
"कैसे कलुषित प्राण हो गए।
मानो मन पाषाण हो गए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
पड़ी अचानक नदी अपार।
घोड़ा उतरे कैसे पार ॥
राणा ने सोचा इस पार।
तब तक चेतक था उस पार ॥
निम्नलिखित में अलंकार है - 'मेघ आए बन-ठन के सँवर के।'
'कहीं साँस लेते हो घर- घर भर देते हो' पंक्ति में निहित अलंकार है -
स्तम्भ-I और स्तम्भ-II को उचित विकल्प से सुमेलित कीजिए -
| स्तम्भ-I | स्तम्भ-II | ||
| (I) | हेमकुंभ ले उषा सवेरे भरती ढुलकाती सुख मेरे। | (अ) | श्लेष अलंकार |
| (II) | हरिमुख मानो मधुर मयंक। | (ब) | उत्प्रेक्षा अलंकार |
| (III) | पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून। | (स) | मानवीकरण अलंकार |
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
उधो, मेरा हृदयतल था एक उद्यान न्यारा।
शोभा देतीं अमित उसमें कल्पना-क्यारियाँ भी।।
