हिंदी

'माली आवत देख कर कलियाँ करैं पुकार' - प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है -

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘माली आवत देख कर कलियाँ करैं पुकार’ - प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है -

विकल्प

  • उत्प्रेक्षा अलंकार

  • अतिशयोक्ति अलंकार

  • मानवीकरण अलंकार

  • श्लेष अलंकार

MCQ
Advertisements

उत्तर

मानवीकरण अलंकार

स्पष्टीकरण:

  • इस पंक्ति में “कलियाँ” को पुकारने की क्रिया करते हुए दिखाया गया है।
  • कलियाँ, जो कि जड़ (निर्जीव) हैं, उन्हें मानव जैसी क्रिया (पुकारना) करते हुए दर्शाया गया है।
  • जब निर्जीव वस्तु में मानवों जैसे गुण या कार्य दर्शाए जाते हैं, तो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
shaalaa.com
अलंकार
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
2022-2023 (March) Outside Delhi 1

संबंधित प्रश्न

निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

मधुबन की छाती को देखो।
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

कहै कवि बेनी बेनी ब्‍याल की चुराई लीनी। 


अलंकार बताइए:
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो


उपमा अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए।


"कैसे कलुषित प्राण हो गए।

मानो मन पाषाण हो गए।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-


निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उपप्रकार लिखिए:

वाक्य प्रकार उपप्रकार
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो ______ ______

निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।

पड़ी अचानक नदी अपार।
घोड़ा उतरे कैसे पार ॥
राणा ने सोचा इस पार।
तब तक चेतक था उस पार ॥


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम पति का, नारियाँ नहीं सह सकती हैं।


“जिसके अरुण - कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”

इस दोहे में निहित अलंकार है -


'जो रहीम गति दीप की कुल कपूत की सोय।
बारै उजियारों करै, बढ़ै अँधेरो होय।'

इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -


'उषा सुनहले तीर बरसती
जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।'

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


'हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।'

इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


'जा तन की झाँई परै श्याम हरित दुति होय।' - इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


निम्नलिखित में अलंकार है - 'मेघ आए बन-ठन के सँवर के।'


निम्नलिखित में अलंकार है - 'मनहूँ रंक निधि लूटन लागी।'


'सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर।' में अलंकार है -


निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

चरण-कमल-सम-कोमल।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×