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प्रश्न
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात।
मनों नीलमनि शैल पर, आतप पर्यो प्रभात।।
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उत्तर
उत्प्रेक्षा अलंकार
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संबंधित प्रश्न
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मधुबन की छाती को देखो।
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
कहै कवि बेनी बेनी ब्याल की चुराई लीनी।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
तीन बेर खाती थीं वे तीन बेर खाती हैं।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
हाय फूल-सी कोमल बच्ची।
हुई राख की थी ढेरी।।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
प्रातः नभ था बहुत नीला शंख जैसे
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
संसार की समरस्थली में धीरता।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
चमचमात चंचल नयन बिच घूँघट पर झीन
मानहु सुरसरिता विमल जल बिछुरत जुग मीन।।
अलंकार बताइए:
बड़े-बड़े पियराए पत्ते
उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग कहाँ और क्यों किया गया है? उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।
कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दैं दैं सनमान को।
अपने द्वारा इस सत्र में पढ़ी किन्हीं दो कविताओं में प्रयुक्त अलंकारों के महत्व का वर्णन कीजिए।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।
चरण सरोज पखारन लागा।
"कैसे कलुषित प्राण हो गए।
मानो मन पाषाण हो गए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
"इधर उठाया धनुष क्रोध में और चढ़ाया उस पर बाण।
धरा, सिंधु, नभ कॉँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
"एक दिवस सूरज ने सोची, छुट्टी ले लेने की बात।
सोचा कुछ पल सुकूँ मिलेगा, चलने दो धरती पर रात।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
पड़ी अचानक नदी अपार।
घोड़ा उतरे कैसे पार ॥
राणा ने सोचा इस पार।
तब तक चेतक था उस पार ॥
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनका नाम लिखिए:
पत्रा ही तिथि पाइयै, वाँ घर के चहुँ पास।
नितप्रति पून्योई रहै, आनन-ओप उजास।।
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
ऊँची-नीची सड़क, बुढ़िया के कूबड़-सी।
नंदनवन-सी फूल उठी, छोटी-सी कुटिया मेरी।
निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:
सिंधु - सेज पर धरा - वधू।
अब तनिक संकुचित बैठी - सी॥
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं
किसी और पर प्रेम पति का, नारियाँ नहीं सह सकती हैं।
“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -
“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”
इस दोहे में निहित अलंकार है -
'उषा सुनहले तीर बरसती
जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।'
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
'जा तन की झाँई परै श्याम हरित दुति होय।' - इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -
“प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।” इस काव्य-पंक्ति में अलंकार है -
“वह शर इधर गांडीव गुण से भिन्न जैसे ही हुआ, धड़ से जयद्रथ का उधर सिर छिन्न वैसे ही हुआ।” - काव्य-पंक्ति में अलंकार है -
'सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी' में अलंकार है -
'उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।' में अलंकार है -
निम्नलिखित में उत्प्रेक्षा अलंकार है -
'सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर।' में अलंकार है -
'आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।'
- प्रस्तुत पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
‘माली आवत देख कर कलियाँ करैं पुकार’ - प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है -
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
चरण-कमल-सम-कोमल।
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उप-प्रकार |
| जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोई। बारे उजियारो करे, बढ़े अँधेरो होई। |
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