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"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए। हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।” इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है- - Hindi Course - A

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प्रश्न

"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।

हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।” 

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-

विकल्प

  • श्लेष

  • उत्प्रेक्षा

  • मानवीकरण

  • अतिशयोक्ति

MCQ
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उत्तर

उत्प्रेक्षा

shaalaa.com
अलंकार
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
2022-2023 (March) Sample

संबंधित प्रश्न

निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

मधुबन की छाती को देखो।
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

हाय फूल-सी कोमल बच्ची।
हुई राख की थी ढेरी।। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

सुख चपला-सा, दुख घन में
उलझा है चंचल मन कुरंग।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

चमचमात चंचल नयन बिच घूँघट पर झीन
मानहु सुरसरिता विमल जल बिछुरत जुग मीन।।


प्रथम दो छंदों में से अलंकार छाँटकर लिखिए और उनसे उत्पन्न काव्य-सौंदर्य पर टिप्पणी कीजिए।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

जान पड़ता है नेत्र देख बड़े-बड़े।
हीरकों में गोल नीलम हैं जड़े।।


"इधर उठाया धनुष क्रोध में और चढ़ाया उस पर बाण।

धरा, सिंधु, नभ कॉँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनका नाम लिखिए:

पत्रा ही तिथि पाइयै, वाँ घर के चहुँ पास। 
नितप्रति पून्योई रहै, आनन-ओप उजास।।  


निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:

वाक्य प्रकार उप-प्रकार
कनक-कनक ते सौ गुनी,
मादकता अधिकाय।
जो खाए बौराय जग,
जो पाए बौराय।
   

निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं
किसी और पर प्रेम पति का, नारियाँ नहीं सह सकती हैं।


“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -


“पल-पल परिवर्तित प्रकृति वेश।” इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”

इस दोहे में निहित अलंकार है -


'सोहत ओढ़े पीत-पट स्याम सलौने गात।
मनो नीलमणि सेल पर आतप परयो प्रभात॥'

इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -


निम्नलिखित में अलंकार है - 'मनहूँ रंक निधि लूटन लागी।'


'उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।' में अलंकार है -


निम्नलिखित में से किन पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है?


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