"कैसे कलुषित प्राण हो गए।
मानो मन पाषाण हो गए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
श्लेष
उत्प्रेक्षा
मानवीकरण
अतिशयोक्ति