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निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए: एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं। किसी और पर प्रेम पति का, नारियाँ नहीं सह सकती हैं।

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प्रश्न

निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम पति का, नारियाँ नहीं सह सकती हैं।

व्याकरण/भाषा
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उत्तर

दृष्टांत अलंकार

shaalaa.com
अलंकार
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2022-2023 (March) Official

संबंधित प्रश्न

निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

लट लटकनि मनो मत्‍त मधुप गन मादक मधुहि पियें। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

कहै कवि बेनी बेनी ब्‍याल की चुराई लीनी। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

हाय फूल-सी कोमल बच्ची।
हुई राख की थी ढेरी।। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

सुख चपला-सा, दुख घन में
उलझा है चंचल मन कुरंग।


अलंकार बताइए:
बड़े-बड़े पियराए पत्ते


अलंकार बताइए:
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल


उपमा अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।

कूक भरी मूकता बुलाए आप बोलि है।


कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? संबंधित वाक्यांश को छाँटकर लिखिए।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

चरण सरोज पखारन लागा।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

जान पड़ता है नेत्र देख बड़े-बड़े।
हीरकों में गोल नीलम हैं जड़े।।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान।।


"कैसे कलुषित प्राण हो गए।

मानो मन पाषाण हो गए।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-


"इधर उठाया धनुष क्रोध में और चढ़ाया उस पर बाण।

धरा, सिंधु, नभ कॉँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


"एक दिवस सूरज ने सोची, छुट्टी ले लेने की बात।

सोचा कुछ पल सुकूँ मिलेगा, चलने दो धरती पर रात।।” 

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-


निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।

लता पवन ले प्रगट भरा, लेहि अक्सर दोय भाइ।
निकसे जनु जुण विमले बिंधु, जलद परले बिलगाइ ॥

निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।

उदित उदय गिरि मंच पर।
रघुबर बाल पतंग।।

निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनका नाम लिखिए:

पत्रा ही तिथि पाइयै, वाँ घर के चहुँ पास। 
नितप्रति पून्योई रहै, आनन-ओप उजास।।  


निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।

ऊँची-नीची सड़क, बुढ़िया के कूबड़-सी।

नंदनवन-सी फूल उठी, छोटी-सी कुटिया मेरी।


निम्नलिखित उदाहरण के रस पहचानकर लिखिए।

कहूँ सुलगत कोउ चिता कहूँ कोड जात लगाई।
एक लगाई जात एक की राख बुझाई।


“सो जनु हमरेहि माथें काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।” इस चौपाई में प्रयुक्त अलंकार है -


“जिसके अरुण - कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


“पल-पल परिवर्तित प्रकृति वेश।” इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


“प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।” इस काव्य-पंक्ति में अलंकार है -


निम्नलिखित में अलंकार है - 'मनहूँ रंक निधि लूटन लागी।'


“वह शर इधर गांडीव गुण से भिन्न जैसे ही हुआ, धड़ से जयद्रथ का उधर सिर छिन्‍न वैसे ही हुआ।” - काव्य-पंक्ति में अलंकार है -


'सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी' में अलंकार है -


'कहीं साँस लेते हो घर- घर भर देते हो' पंक्ति में निहित अलंकार है -


निम्नलिखित में उत्प्रेक्षा अलंकार है -


'सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर।' में अलंकार है -


'को घटि ये वृषभानुजा वे हलधर के वीर' - प्रस्तुत पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


निम्नलिखित में से किन पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है?


स्तम्भ-I और स्तम्भ-II को उचित विकल्प से सुमेलित कीजिए -

  स्तम्भ-I   स्तम्भ-II
(I) हेमकुंभ ले उषा सवेरे भरती ढुलकाती सुख मेरे। (अ) श्लेष अलंकार
(II) हरिमुख मानो मधुर मयंक। (ब) उत्प्रेक्षा अलंकार
(III) पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून। (स) मानवीकरण अलंकार

निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

चरण-कमल-सम-कोमल।


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