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प्रश्न
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि।
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उत्तर
कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि। - अनुप्रास अलंकार
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लट लटकनि मनो मत्त मधुप गन मादक मधुहि पियें।
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मधुबन की छाती को देखो।
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।
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जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं।
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सुख चपला-सा, दुख घन में
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निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
चमचमात चंचल नयन बिच घूँघट पर झीन
मानहु सुरसरिता विमल जल बिछुरत जुग मीन।।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।
करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान।।
"अर्थ बिना कब पूर्ण हैं, शब्द, सकल जग-काज।
अर्थ अगर आ जाए तो, ठाठ-बाट औ राज।।"
इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है-
'जा तन की झाँई परै श्याम हरित दुति होय।' - इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -
'आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।'
- प्रस्तुत पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
स्तम्भ-I और स्तम्भ-II को उचित विकल्प से सुमेलित कीजिए -
| स्तम्भ-I | स्तम्भ-II | ||
| (I) | हेमकुंभ ले उषा सवेरे भरती ढुलकाती सुख मेरे। | (अ) | श्लेष अलंकार |
| (II) | हरिमुख मानो मधुर मयंक। | (ब) | उत्प्रेक्षा अलंकार |
| (III) | पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून। | (स) | मानवीकरण अलंकार |
