'उषा सुनहले तीर बरसती जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।'
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
श्लेष
अतिशयोक्ति
उत्प्रेक्षा
मानवीकरण