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निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए। करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान।।

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प्रश्न

निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान।।

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उत्तर

दृष्टांत अलंकार

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अलंकार
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2021-2022 (March) Set 1

संबंधित प्रश्न

निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

लट लटकनि मनो मत्‍त मधुप गन मादक मधुहि पियें। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

मेरी भव-बाधा हरौ राधा नागरि सोई।
जा तन की झाईं परै, स्‍यामु हरित दुति होई।।


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

कहै कवि बेनी बेनी ब्‍याल की चुराई लीनी। 


निम्‍न वाक्‍य में अलंकार पहचानकर बताइए : 

मानो घर-घर न हो, जैसे कोई चिड़ियाघर हो।
जिसमें खूँखार जानवर आबाद हों।


अलंकार बताइए:
बड़े-बड़े पियराए पत्ते


अलंकार बताइए:
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल


उपमा अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।

कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दैं दैं सनमान को।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।

कूक भरी मूकता बुलाए आप बोलि है।


अपने द्वारा इस सत्र में पढ़ी किन्हीं दो कविताओं में प्रयुक्त अलंकारों के महत्व का वर्णन कीजिए।


निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।

जान पड़ता है नेत्र देख बड़े-बड़े।
हीरकों में गोल नीलम हैं जड़े।।


"कैसे कलुषित प्राण हो गए।

मानो मन पाषाण हो गए।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-


"एक दिवस सूरज ने सोची, छुट्टी ले लेने की बात।

सोचा कुछ पल सुकूँ मिलेगा, चलने दो धरती पर रात।।” 

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-


"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।

हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।” 

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-


निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।

पड़ी अचानक नदी अपार।
घोड़ा उतरे कैसे पार ॥
राणा ने सोचा इस पार।
तब तक चेतक था उस पार ॥


निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।

लता पवन ले प्रगट भरा, लेहि अक्सर दोय भाइ।
निकसे जनु जुण विमले बिंधु, जलद परले बिलगाइ ॥

निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनका नाम लिखिए:

पत्रा ही तिथि पाइयै, वाँ घर के चहुँ पास। 
नितप्रति पून्योई रहै, आनन-ओप उजास।।  


निम्नलिखित उदाहरण के रस पहचानकर लिखिए।

कहूँ सुलगत कोउ चिता कहूँ कोड जात लगाई।
एक लगाई जात एक की राख बुझाई।


निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:

वाक्य प्रकार उप-प्रकार
कनक-कनक ते सौ गुनी,
मादकता अधिकाय।
जो खाए बौराय जग,
जो पाए बौराय।
   

निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।


“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -


“जिसके अरुण - कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


'जा तन की झाँई परै श्याम हरित दुति होय।' - इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


निम्नलिखित में अलंकार है - 'मेघ आए बन-ठन के सँवर के।'


“प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।” इस काव्य-पंक्ति में अलंकार है -


निम्नलिखित में अलंकार है - 'मनहूँ रंक निधि लूटन लागी।'


'सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी' में अलंकार है -


'कहीं साँस लेते हो घर- घर भर देते हो' पंक्ति में निहित अलंकार है -


'उस काल मारे क्रोध के, तन काँपने उसका लगा। मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा।' में अलंकार है -


निम्नलिखित में उत्प्रेक्षा अलंकार है -


'सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर।' में अलंकार है -


'आगे नदियाँ पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।'

- प्रस्तुत पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -


'को घटि ये वृषभानुजा वे हलधर के वीर' - प्रस्तुत पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -


निम्नलिखित में से किन पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है?


निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात।
मनों नीलमनि शैल पर, आतप पर्‌यो प्रभात।।


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