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प्रश्न
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
उधो, मेरा हृदयतल था एक उद्यान न्यारा।
शोभा देतीं अमित उसमें कल्पना-क्यारियाँ भी।।
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उत्तर
रूपक अलंकार
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संबंधित प्रश्न
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
लट लटकनि मनो मत्त मधुप गन मादक मधुहि पियें।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मेरी भव-बाधा हरौ राधा नागरि सोई।
जा तन की झाईं परै, स्यामु हरित दुति होई।।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
कहै कवि बेनी बेनी ब्याल की चुराई लीनी।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
संसार की समरस्थली में धीरता।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
चमचमात चंचल नयन बिच घूँघट पर झीन
मानहु सुरसरिता विमल जल बिछुरत जुग मीन।।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मानो घर-घर न हो, जैसे कोई चिड़ियाघर हो।
जिसमें खूँखार जानवर आबाद हों।
अलंकार बताइए:
बड़े-बड़े पियराए पत्ते
अलंकार बताइए:
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो
अलंकार बताइए:
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल
उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग कहाँ और क्यों किया गया है? उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
प्रथम दो छंदों में से अलंकार छाँटकर लिखिए और उनसे उत्पन्न काव्य-सौंदर्य पर टिप्पणी कीजिए।
कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? संबंधित वाक्यांश को छाँटकर लिखिए।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार के नाम पहचानकर लिखिए।
जान पड़ता है नेत्र देख बड़े-बड़े।
हीरकों में गोल नीलम हैं जड़े।।
"कैसे कलुषित प्राण हो गए।
मानो मन पाषाण हो गए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
"इधर उठाया धनुष क्रोध में और चढ़ाया उस पर बाण।
धरा, सिंधु, नभ कॉँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
"एक दिवस सूरज ने सोची, छुट्टी ले लेने की बात।
सोचा कुछ पल सुकूँ मिलेगा, चलने दो धरती पर रात।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उपप्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उपप्रकार |
| पायो जी मैंने राम रतन धन पायो | ______ | ______ |
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
रघुबर बाल पतंग।।
निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनका नाम लिखिए:
पत्रा ही तिथि पाइयै, वाँ घर के चहुँ पास।
नितप्रति पून्योई रहै, आनन-ओप उजास।।
निम्नलिखित उदाहरण के रस पहचानकर लिखिए।
कहूँ सुलगत कोउ चिता कहूँ कोड जात लगाई।
एक लगाई जात एक की राख बुझाई।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
निम्नलिखित पंक्ति में उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:
एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।
किसी और पर प्रेम पति का, नारियाँ नहीं सह सकती हैं।
“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -
“सो जनु हमरेहि माथें काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।” इस चौपाई में प्रयुक्त अलंकार है -
“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”
इस दोहे में निहित अलंकार है -
'सोहत ओढ़े पीत-पट स्याम सलौने गात।
मनो नीलमणि सेल पर आतप परयो प्रभात॥'
इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -
'उषा सुनहले तीर बरसती
जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।'
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
'हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।'
इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -
'देखि सुदामा की दीन-दशा करुणा करके करुणानिधि रोए,
पानी परात कौ हाथ छुऔ नहिं नैनन के जल सौं पग धोए।'
इस काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
“प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।” इस काव्य-पंक्ति में अलंकार है -
'सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी' में अलंकार है -
'कहीं साँस लेते हो घर- घर भर देते हो' पंक्ति में निहित अलंकार है -
निम्नलिखित में उत्प्रेक्षा अलंकार है -
'सुबरन को खोजत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर।' में अलंकार है -
निम्नलिखित में से किन पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है?
‘माली आवत देख कर कलियाँ करैं पुकार’ - प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है -
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उप-प्रकार |
| जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोई। बारे उजियारो करे, बढ़े अँधेरो होई। |
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