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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए: एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह

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Questions

मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए:

एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह - हंस का इनकार - कौए का घसीटकर ले जाना - कौए का चोंच नचा - नचाकर दही खाना - हंस का बिलकुल न खाना - आहट पाकर कौए का उड़ जाना - हंस का पकड़ा जाना - परिणाम - शीर्षक।

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:

एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह - हंस का इनकार - कौए का घसीटकर ले जाना - कौए का चोंच नचा-नचाकर दही खाना - हंस का बिलकुल न खाना-आहट पाकर कौए का उड़ जाना - हंस का पकड़ा जाना - परिणाम - शीर्षक - सीख।

Writing Skills
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Solution

दोस्ती का परीक्षण: हंस और कौआ की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक हंस और एक कौआ बहुत अच्छे दोस्त थे। ये दोनों सुबह से शाम तक साथ में उड़ते रहते थे। इनकी मित्रता कुछ खास थी, जिसमें कि हंस कभी भी घमंडी नहीं होता था और कौआ भी कभी अपनी मित्रता से गरीब नहीं महसूस करता था।

एक दिन, हंस ने कौए को अपने साथ उड़ने का आमंत्रण दिया। कौए ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। एक दिन, जब हंस और कौआ उड़ रहे थे, वे एक बगले को देखते हैं, जिसके हाथ में एक बड़ा दही वाला था। कौआ ने हंस से कहा, “देख, वह खालिस दही लेकर जा रहा है। हमें भी दही खाना चाहिए।” हंस ने दहीवाले की ओर देखा और उसमें स्वादिष्ट दही की खुशबू महसूस की। कौआ ने उससे दही खाने का प्रस्ताव दिया। हंस ने हँसते हुए कहा, “मेरे दोस्त, मैं दही नहीं खा सकता। मैं सिर्फ जल का ही सेवन करता हूँ।” कौआ ने तल्ख़ होकर कहा, “तू एक बगुला खा ले, बहुत स्वादिष्ट है।” हंस ने इनकार किया, लेकिन कौआ ने उसे ज़बरदस्ती खिला ही दिया। जैसे ही उसने दही निकाली और खुशी-खुशी खा ली। इसके बाद, कौआ ने अपने चोंच से नाचते हुए कहा, “यह दही कितनी स्वादिष्ट थी, तुझे क्यों नहीं पसंद आई?” हंस ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, “मेरा स्वाद तो सिर्फ जल पर है, और मैं सचमुच सुखी हूँ जल में ही।” इसके बाद, एक हंस का कौआ के साथ दोस्ती में अहितकारी बनी रही, और हंस ने कौए के साथ उदारता और समझदारी का प्रदर्शन किया।

आहट पाकर ग्वाला तुरंत वहाँ पहुँचा और हंस को पकड़ लिया। कौआ अवसर देखकर तुरंत उड़ गया और हंस मुसीबत में फँस गया।

दोस्ती में समझदारी और उदारता बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, और हमें दूसरों की पसंद और अनुसरण को समझना चाहिए।

सीख: लालच बुरी बला है और गलत संगति का परिणाम हानिकारक होता है। हमें दूसरों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। सच्चा मित्र वही है जो सही मार्ग दिखाए और अनुशासन तथा संयम का पालन करे। कठिन समय में समझदारी ही हमारी रक्षा करती है।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 1.8: कर्मवीर - स्‍वाध्याय [Page 28]

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Balbharati Hindi Composite Lokvani Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 1.8 कर्मवीर
स्‍वाध्याय | Q १. | Page 28

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शब्‍दों के आधार पर कहानी लिखो :

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निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

अपने ग्राम/नगर/महानगर के संबंधित अधिकारी को बच्चों के खेलने के लिए बगीचा बनवाने हेतु पत्र लिखिए। (पत्र निम्‍न प्रारूप में हो)

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प्रति,

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