English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 8th Standard

मैंने समझा लकड़हारा और वन पाठ से - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

मैंने समझा लकड़हारा और वन पाठ से 

Short Answer
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Solution

पेड़ हमारे जीवनदाता हैं। इनसे हमें बहुत सारे फायदे हैं। हमारा जीवन इन्हीं पर अवलंबित है। ये हमें अपना सब कुछ देते हैं और बदले में हमसे कुछ नहीं माँगते। अत: हमें इनकी रक्षा करने में अपना योगदान देना चाहिए तथा अधिक-से-अधिक पेड़ लगाने चाहिए।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 2.3: लकड़हारा और वन - उपयोजित लेखन [Page 33]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Sulabhbharati [English] Standard 8 Maharashtra State Board
Chapter 2.3 लकड़हारा और वन
उपयोजित लेखन | Q (२) | Page 33

RELATED QUESTIONS

अपने विद्‌यालय में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह का प्रमुख मुद्दों सहित वृत्‍तांत लेखन करो।


निम्‍न मुद्दों के आधार पर विज्ञापन लिखो :

स्‍थल/जगह, संपर्क, पुस्तक मेला, दिनांक, समय


मैंने समझा नहीं कुछ इससे बढ़कर कविता से 


‘सड़क दुर्घटनाएँ : कारण एवं उपाय’ निबंध लिखो।



।। हम विज्ञान लोक के वासी ।।



हजारी प्रसाद द्विवेदी की ‘कबीर ग्रंथावली’ से पाँच दोहे ढूँढकर सुंदर अक्षरों में लिखो।


यदि तुम्हारा घर मंगल ग्रह पर होता तो .....


किसी शहीद और उसके परिवार के बारे में सुनो: मुद्दे - जन्म तिथि, गाँव, शिक्षा, घटना।


ॠतुओं के नाम बताते हुए उनके परिवर्तन की जानकारी प्राप्त कराे और लिखो।


अपने मनपसंद व्यक्ति का साक्षात्कार लेने हेतु कोई पॉंच प्रश्न बनाकर बताओ।


।। सौर ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा ।।


यदि सच में हमारे मामा का घर चॉंद पर होता तो...


समाज सेवी महिला की जीवनी पढ़कर प्रेरणादायी अंश चुनाे और बताओ।


अक्षर समूह में से खिलाड़ियों के नाम बताओ और लिखो।

ना सा वा ने  
ध्या चं        
शा जा बा खा    
ल्खा सिं मि        
री काॅ मे        
नि मि सा र्जा या      
डु तें चि

अपना परिचय देते हुए परिवार के बारे में दस वाक्य लिखो।


दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-

डिजिटल युग और मैं


दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-

परीक्षा तनाव के कारण व इसे रोकने के उपाये


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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