English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

मैंने समझा जहाँ चाह, वहाँ राह पाठ से

Advertisements
Advertisements

Question

मैंने समझा जहाँ चाह, वहाँ राह पाठ से 

One Line Answer
Advertisements

Solution

प्रस्तुत कहानी में यह दर्शाया गया है कि यदि हमारे मन में एकता एवं समर्पण का भाव हो, तो हम किसी भी समस्या पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 1.07: जहाँ चाह, वहाँ राह - मैंने समझा [Page 20]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
Chapter 1.07 जहाँ चाह, वहाँ राह
मैंने समझा | Q (१) | Page 20

RELATED QUESTIONS

अंतरजाल से डॉ. रामकुमार वर्मा जी से संबंधित अन्य साहित्‍यिक जानकारियाँ प्राप्त करो।


‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखो।


मैंने समझा अंधायुग कविता से।  


।।श्रद्‌धा और विज्ञान, जीवन के दो पक्ष महान।।


त्योहार मनाने के उद्देश्य की वैज्ञानिकता सुनो और सुनाओ।



अपने चित्र के बारे में बोलो।


प्लास्टिक, थर्माकोल आदि प्रदूषण बढ़ाने वाले घटकों का उपयोग हानिकारक है।


यदि साइकिल तुमसे बोलने लगी तो ......


प्राकृतिक संपदाओं की बचत करना आवश्यक है।


यदि सच में हमारे मामा का घर चॉंद पर होता तो...


।। करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान ।।


किसी एक संस्मरणीय घटना का वर्णन करो।


।। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन। याेगासन है, उत्तम साधन ।।


।। जीवदया ही भूतदया है ।।


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए -

आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस का समाज पर प्रभाव


‘मैं पंछी बोल रहा हूँ ...’ विषय पर निबंध लिखिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×