Advertisements
Advertisements
Question
अक्षर समूह में से खिलाड़ियों के नाम बताओ और लिखो।
| इ | ह | ना | सा | ल | वा | ने | |
| ध्या | द | चं | न | ||||
| व | शा | ध | जा | बा | खा | ||
| ह | ल्खा | सिं | मि | ||||
| म | री | काॅ | मे | ||||
| नि | मि | सा | र्जा | या | |||
| न | र | स | ल | डु | तें | क | चि |
Chart
Advertisements
Solution
| इ | ह | ना | सा | ल | वा | ने | - | साइना नेहवाल | |
| ध्या | द | चं | न | - | ध्यानचंद | ||||
| व | शा | ध | जा | बा | खा | - | खाशाबा जाधव | ||
| ह | ल्खा | सिं | मि | - | मिल्खा सिंह | ||||
| म | री | काॅ | मे | - | मेरी कॉम | ||||
| नि | मि | सा | र्जा | या | - | सानिया मिर्जा | |||
| न | र | स | ल | डु | तें | क | चि | - | सचिन तेंडुलकर |
shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
Is there an error in this question or solution?
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
‘छाते की आत्मकथा’ विषय पर निबंध लिखो।
मैंने समझा खेती से आई तब्दीलियाँ पाठ से
यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ तो ....

पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होळकर के कार्य पढ़ो और प्रमुख मुद्दे बताओ।
किसी दुकानदार और ग्राहक के बीच होने वाला संवाद लिखो और सुनाओ: जैसे - माँ और सब्जीवाली।
सच्चाई में ही सफलता निहित है।
नीतिपरक दोहे सुनो और आनंदपूर्वक सुनाओ।
मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो:

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
