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मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए: एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह

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प्रश्न

मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए:

एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह - हंस का इनकार - कौए का घसीटकर ले जाना - कौए का चोंच नचा - नचाकर दही खाना - हंस का बिलकुल न खाना - आहट पाकर कौए का उड़ जाना - हंस का पकड़ा जाना - परिणाम - शीर्षक।

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:

एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह - हंस का इनकार - कौए का घसीटकर ले जाना - कौए का चोंच नचा-नचाकर दही खाना - हंस का बिलकुल न खाना-आहट पाकर कौए का उड़ जाना - हंस का पकड़ा जाना - परिणाम - शीर्षक - सीख।

लेखन कौशल
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उत्तर

दोस्ती का परीक्षण: हंस और कौआ की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक हंस और एक कौआ बहुत अच्छे दोस्त थे। ये दोनों सुबह से शाम तक साथ में उड़ते रहते थे। इनकी मित्रता कुछ खास थी, जिसमें कि हंस कभी भी घमंडी नहीं होता था और कौआ भी कभी अपनी मित्रता से गरीब नहीं महसूस करता था।

एक दिन, हंस ने कौए को अपने साथ उड़ने का आमंत्रण दिया। कौए ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। एक दिन, जब हंस और कौआ उड़ रहे थे, वे एक बगले को देखते हैं, जिसके हाथ में एक बड़ा दही वाला था। कौआ ने हंस से कहा, “देख, वह खालिस दही लेकर जा रहा है। हमें भी दही खाना चाहिए।” हंस ने दहीवाले की ओर देखा और उसमें स्वादिष्ट दही की खुशबू महसूस की। कौआ ने उससे दही खाने का प्रस्ताव दिया। हंस ने हँसते हुए कहा, “मेरे दोस्त, मैं दही नहीं खा सकता। मैं सिर्फ जल का ही सेवन करता हूँ।” कौआ ने तल्ख़ होकर कहा, “तू एक बगुला खा ले, बहुत स्वादिष्ट है।” हंस ने इनकार किया, लेकिन कौआ ने उसे ज़बरदस्ती खिला ही दिया। जैसे ही उसने दही निकाली और खुशी-खुशी खा ली। इसके बाद, कौआ ने अपने चोंच से नाचते हुए कहा, “यह दही कितनी स्वादिष्ट थी, तुझे क्यों नहीं पसंद आई?” हंस ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, “मेरा स्वाद तो सिर्फ जल पर है, और मैं सचमुच सुखी हूँ जल में ही।” इसके बाद, एक हंस का कौआ के साथ दोस्ती में अहितकारी बनी रही, और हंस ने कौए के साथ उदारता और समझदारी का प्रदर्शन किया।

आहट पाकर ग्वाला तुरंत वहाँ पहुँचा और हंस को पकड़ लिया। कौआ अवसर देखकर तुरंत उड़ गया और हंस मुसीबत में फँस गया।

दोस्ती में समझदारी और उदारता बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, और हमें दूसरों की पसंद और अनुसरण को समझना चाहिए।

सीख: लालच बुरी बला है और गलत संगति का परिणाम हानिकारक होता है। हमें दूसरों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। सच्चा मित्र वही है जो सही मार्ग दिखाए और अनुशासन तथा संयम का पालन करे। कठिन समय में समझदारी ही हमारी रक्षा करती है।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 1.8: कर्मवीर - स्‍वाध्याय [पृष्ठ २८]

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बालभारती Hindi Composite Lokvani Standard 10 Maharashtra State Board
अध्याय 1.8 कर्मवीर
स्‍वाध्याय | Q १. | पृष्ठ २८

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