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अंतरजाल से पद्‌मभूषण से विभूषित विभूतियों की जानकारी का संकलन करके सुनाओ।

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प्रश्न

अंतरजाल से पद्‌मभूषण से विभूषित विभूतियों की जानकारी का संकलन करके सुनाओ।

सारिणी
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उत्तर

क्र. नाम स्थान क्षेत्र
१. विश्वमोहन भट्ट राजस्थान कला - संगीत 
२. प्रा. डॉ. देवी प्रसाद द्विवेदी उत्तर प्रदेश साहित्य - शिक्षा
३. एच.आर.एच प्रिन्सेस महाचक्री सिरींधोर्न (विदेशी)  थायलंड साहित्य - शिक्षा
४. चो रामस्वामी (मरणोपरांत) तमिलनाडु साहित्य - शिक्षा पत्रकारिता
५. तेहम्तन उद्वाडिया महाराष्ट्र वैद्यकीय
६. रत्नसुंदर महाराज गुजरात अन्य - आध्यात्म
७. स्वामी निरंजन नंदा सरस्वती बिहार अन्य - योग
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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 1.06: ‘पृथ्‍वी’ से ‘अग्‍नि’ तक - खोजबीन [पृष्ठ १५]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 1.06 ‘पृथ्‍वी’ से ‘अग्‍नि’ तक
खोजबीन | Q (१) | पृष्ठ १५
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 6 'पृथ्वी' से 'अग्नि' तक
अंतःपाठ प्रश्न | Q ६. | पृष्ठ ४९

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____________


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“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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