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मैंने समझा मेरा विद्रोह पाठ से - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

मैंने समझा मेरा विद्रोह पाठ से 

लघु उत्तरीय
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उत्तर

माता-पिता हमारा भला ही सोचते हैं। वे हमें अच्छी शिक्षा देकर हमारा भविष्य उज्ज्वल करने में अपना हर संभव प्रयास करते हैं। हमारी बुरी आदतों को खत्म करने के लिए वे हमसे सख्ती से पेश आते हैं, परंतु भीतर से वे हमसे बहुत प्रेम करते हैं। अत: हमें अपने पिता द्वारा लगाई गई रोक-टोक को गलत न समझकर उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए और सदैव उनका सम्मान करना चाहिए।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 2.8: मेरा विद्रोह - उपयोजित लेखन [पृष्ठ ४९]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
अध्याय 2.8 मेरा विद्रोह
उपयोजित लेखन | Q (२) | पृष्ठ ४९

संबंधित प्रश्न

अपने विद्‌यालय में आयोजित ‘स्‍वच्छता अभियान’ का वृत्‍तांत लिखो। वृत्‍तांत में स्‍थल, काल, घटना का उल्‍लेख आवश्यक है।



यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ तो ....


निम्नलिखित शब्द की सहायता से नए शब्द बनाओ:

 


‘चतुराई’ संबंधी कोई सुनी हुई कहानी सुनाओ।


।। सत्यमेव जयते ।।


।। कथनी मीठी खाँड़-सी ।।


मैंने समझा शब्द संपदा पाठ से 


भारतीय मूल की किसी महिला अंतरिक्ष यात्री संबंधी जानकारी पढ़ो तथा विश्व के अंतरिक्ष यात्रियों के नाम बताओ।


प्लास्टिक, थर्माकोल आदि प्रदूषण बढ़ाने वाले घटकों का उपयोग हानिकारक है।


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


यदि साइकिल तुमसे बोलने लगी तो ......


उल्लेखनीय कार्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं।


प्राकृतिक संपदाओं की बचत करना आवश्यक है।


मीरा का पद पढ़ो और सरल अर्थ बताओ।


हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए।


नीचे दिए गए राष्ट्रीय प्रतीक का चित्र देखो और उनका नाम लिखो:


शाक (पत्तोंवाली) और सब्जियों के पाँच-पाँच नाम सुनो और सुनाओ।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

निम्नलिखित वाक्य से अंत करते हुए एक कहानी लिखिए:

'.....और मैं चाह कर भी उस कारुणिक दृश्य को भुला नहीं पाया, पायी'।


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