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प्रश्न
यदि प्रकृति में सुंदर - सुंदर रंग नहीं होते तो ..........
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उत्तर
यदि प्रकृति में सुंदर-सुंदर रंग नहीं होते तो पूरी प्रकृति ही बेरंग नजर आती। प्रकृति के सुंदर रंगों को देखकर मन प्रफुल्लित हो उठता है। रंगों के अभाव में सारी प्रकृति, सारे जीव-जंतु, मानव, पेड़-पौधे, फल-फूल एक ही जैसे नजर आते।
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चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________
यदि मैं पुस्तक होता/होती तो ......
उल्लेखनीय कार्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं।
अक्षर समूह में से खिलाड़ियों के नाम बताओ और लिखो।
| इ | ह | ना | सा | ल | वा | ने | |
| ध्या | द | चं | न | ||||
| व | शा | ध | जा | बा | खा | ||
| ह | ल्खा | सिं | मि | ||||
| म | री | काॅ | मे | ||||
| नि | मि | सा | र्जा | या | |||
| न | र | स | ल | डु | तें | क | चि |
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
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