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प्रश्न
मैंने समझा शब्द संपदा पाठ से
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उत्तर
शब्दों का संसार अनोखा व विस्तृत है। मानवीय भावनाओं के प्रत्येक रूप को दर्शाने के लिए शब्द अनेक रूपों में उपलब्ध हैं। जो शब्द बुरे अर्थ प्रकट करते हैं, वे संबंधों में दीवार खड़ी कर देते हैं। ऐसे शब्दों को जीवन के व्यवहार से निकाल देना चाहिए। अपनी शब्द संपदा विकसित करने के लिए साहित्य, शब्दकोश तथा अलग-अलग ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़नी चाहिए। वाचन संस्कृति के कारण ही हम शब्द संपदा के धनी हो सकते हैं।
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| शब्द | पंचमाक्षर | उसी वर्ग के अन्य शब्द |
| पंकज | ______ | ______ |
| चंचल | ______ | ______ |
| ठंडा | ______ | ______ |
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| पेरांबूर | ______ | ______ |
| पंछी | ______ | ______ |
| बंदरगाह | ______ | ______ |
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चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

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नीचे दिए गए नोबल पुरस्कार प्राप्त विभूति के चित्र चिपकाओ। उन्हें यह पुरस्कार किस लिए प्राप्त हुआ है, बताओ।
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| ५. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर | ६. अमर्त्यकुमार सेन | ७. वेंकटरमन रामकृष्णन | ८. कैलास सत्यार्थी |
यदि सच में हमारे मामा का घर चॉंद पर होता तो...
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निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
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