हिंदी

मैंने समझा अंधायुग कविता से।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

मैंने समझा अंधायुग कविता से।  

लघु उत्तरीय
Advertisements

उत्तर

मानव की उन्नति और अवनति दोनों उसी के हाथों में है। यदि वह चाहे तो सत्कर्मों से अपने जीवन को सफल बना सकता है और यदि चाहे तो गलत राह अपनाकर अपने जीवन को व्यर्थ कर सकता है।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 2.6: अंधायुग - स्‍वयं अध्ययन [पृष्ठ ४१]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
अध्याय 2.6 अंधायुग
स्‍वयं अध्ययन | Q (२) | पृष्ठ ४१

संबंधित प्रश्न

अंतरजाल से डॉ. रामकुमार वर्मा जी से संबंधित अन्य साहित्‍यिक जानकारियाँ प्राप्त करो।


‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखो।


पानी, वाणी, दूध इन शब्‍दों का उपयोग करते हुए कोई कविता लिखो।


स्‍वामी विवेकानंद का कोई भाषण पढ़ो और प्रमुख वाक्‍य बताओ।



 


।। हम सब एक हैं ।।


यदि तुम सैनिक होते तो .....


बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?


हमें सदैव प्रसन्न रहना चाहिए।


उल्लेखनीय कार्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं।


।। हे विश्वचि माझे घर ।।


नियत विषय पर भाषण तैयार करो।


जीवन में मॉं का स्थान असाधारण है।


।। जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।।


पसंदीदा विषय पर विज्ञापन बनाकर उसको पढ़ो।


सद्‌गुणों को आत्मसात करने के लिए क्या करोगे, इसपर आपस में चर्चा करो।


ऐतिहासिक वास्तुओं का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है।


निम्नलिखित वाक्य से अंत करते हुए एक कहानी लिखिए:

'.....और मैं चाह कर भी उस कारुणिक दृश्य को भुला नहीं पाया, पायी'।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×