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ॠतुओं के नाम बताते हुए उनके परिवर्तन की जानकारी प्राप्त कराे और लिखो।

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प्रश्न

ॠतुओं के नाम बताते हुए उनके परिवर्तन की जानकारी प्राप्त कराे और लिखो।

सारिणी
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उत्तर

भारतवर्ष में कुल छह ऋतुएँ पड़ती हैं − 

बसंत ऋतु: बसंत ऋतु में प्रकृति बड़ी सुहावनी हो जाती है। हर तरफ रंग-बिरंगे फूल व हरे-भरे वृक्ष दिखाई देते हैं।
ग्रीष्म ऋतु: ग्रीष्म में भीषण गर्मी पड़ती है। इस दौरान आम, जामुन जैसे रसीले फलों का आनंद हम उठाते हैं।
वर्षा ऋतु: वर्षा ऋतु में बरसात के कारण तालाब, नदी आदि पानी से भर जाते हैं।
शरद ऋतु: यह ऋतु बहुत ही सुहावनी होती है। इस दौरान न अधिक गर्मी होती है और न ही ठंड होती है।
हेमंत ऋतु: हेमंत में ठंडी बढ़ जाती है। इस दौरान दिन छोटे होने लगते हैं और रातें बड़ी।
शिशिर ऋतु: इस ऋतु में सर्दी अधिक होती है। दिन छोटे हो जाते हैं और रातें बड़ी।
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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.02: बसंती हवा - बसंती हवा [पृष्ठ ६]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 6 Maharashtra State Board
अध्याय 1.02 बसंती हवा
बसंती हवा | Q (५) | पृष्ठ ६

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“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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