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मैंने समझा धरती का आँगन महके कविता से

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प्रश्न

मैंने समझा धरती का आँगन महके कविता से 

लघु उत्तरीय
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उत्तर

मनुष्य को अपने कर्म, ज्ञान व विज्ञान से विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहिए। विध्वंसक अस्त्र-शस्त्र का निर्माण कर एक-दूसरे के मन में भय उत्पन्न करने की अपेक्षा प्रेम व सहयोग की भावना का निर्माण करना श्रेष्ठ है। यह संपूर्ण धरती एक परिवार है और हम सभी उसके सदस्य हैं। इस भावना में ही संपूर्ण मानवजाति का विकास निहित है।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 2.1: धरती का आँगन महके - उपयोजित लेखन [पृष्ठ २६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
अध्याय 2.1 धरती का आँगन महके
उपयोजित लेखन | Q 2 | पृष्ठ २६

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।। हम सब एक हैं ।।


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____________


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मी भा हो भा     - ______
नी से ज भि र   - ______
मं बं जू स ल   - ______
स्क रा र्य भा चा   - ______
जे. क म ला ए.  पी. - ______
जा अ न म्म की ल - ______
ना व क ला चा ल्प - ______

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निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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